Moradabad: ठंड में नवजातों पर मंडरा रहा हाइपोथर्मिया का खतरा, हर तीसरा बच्चा प्रभावित

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। भीषण ठंड के साथ ही नवजातों में हाइपोथर्मिया का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। महिला अस्पताल में जन्म लेने वाले शिशुओं में यह समस्या गंभीर रूप लेती दिख रही है। चिकित्सकों के अनुसार यहां जन्म लेने वाला लगभग हर तीसरा बच्चा हाइपोथर्मिया की चपेट में आ रहा है। ठंड के मौसम में नवजातों के शरीर का तापमान संतुलित रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

चिकित्सकों के अनुसार नवजात का सामान्य तापमान 36.5 से 37.5 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए, लेकिन जन्म के तुरंत बाद वातावरण के संपर्क में आने से कई बच्चों का तापमान तेजी से गिर जाता है। तापमान 36 डिग्री से नीचे पहुंचते ही शिशु हाइपोथर्मिया की श्रेणी में आ जाता है, जो उसके लिए घातक भी साबित हो सकता है। इसका सीधा असर बच्चे की सांस, दिल की धड़कन और संक्रमण से लड़ने की क्षमता पर पड़ता है। 

इस खतरे को देखते हुए महिला अस्पताल में डिलीवरी प्वाइंट पर रेडिएंट वॉर्मर की व्यवस्था की गई है ताकि जन्म लेते ही शिशु को गर्म वातावरण मिल सके। चिकित्साधिकारियों का कहना है कि डिलीवरी से पहले ही रेडिएंट वॉर्मर को चालू कर दिया जाता है, जिससे बच्चे को जन्म के बाद तुरंत सुरक्षित तापमान मिल सके। साथ ही नवजात को सूखे और गर्म कपड़े में लपेटने, मां के संपर्क में रखने और अनावश्यक देरी से बचने जैसे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं।
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हाइपोथर्मिया नवजातों के लिए गंभीर समस्या
सीएमएस डॉ. निर्मला पाठक ने बताया कि हाइपोथर्मिया नवजातों के लिए एक गंभीर समस्या है, खासकर सर्दियों में। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी डिलीवरी प्वाइंट पर रेडिएंट वॉर्मर लगाए गए हैं। डिलीवरी से पहले वॉर्मर को चालू कर दिया जाता है, ताकि बच्चे को जन्म लेते ही आवश्यक गर्माहट मिल सके। साथ ही नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं कि नवजात के तापमान पर लगातार निगरानी रखी जाए। बताया कि समय से पहले जन्म लेने वाले और कम वजन वाले बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक रहता है। ऐसे शिशुओं को विशेष निगरानी में रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर एनआईसीयू में शिफ्ट किया जाता है। वहां, भी वार्मर की व्यवस्था है। चिकित्सकों का मानना है कि यदि समय रहते हाइपोथर्मिया की पहचान कर ली जाए और उचित तापमान बनाए रखा जाए, तो नवजातों को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।

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