बच्चों के मन से गणित का डर भगाएगी प्रयोगशाला... भारतीय गणित सोसायटी ने की पहल, ट्रिकी और मैजिक मैथ को देंगे बढ़ावा

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
On

माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित की जाएगी गणित प्रयोगशाला

मार्कण्डेय पाण्डेय, लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद में गणित पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है। वर्ष 2021 के बाद चार वर्षों में इंटरमीडिएट के लगभग एक लाख छात्रों की कमी दर्ज की गई है। इस स्थिति को लेकर विश्वविद्यालयों के गणित शिक्षक भी चिंतित हैं और बच्चों के मन से “मैथ फोबिया” दूर करने के लिए कई स्तरों पर पहल शुरू की जा रही है। इसी कड़ी में पहली बार माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशाला की तर्ज पर गणित प्रयोगशाला स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित भारतीय गणित परिषद के करीब 100 वर्षों के इतिहास में पहली बार स्कूल स्तर की गणित शिक्षा पर गंभीर चर्चा हुई है। परिषद के अध्यक्ष प्रो. एसएस खरे ने बताया कि स्कूली छात्रों में गणित के प्रति भय दूर करने के लिए ट्रिकी और मैजिक मैथ का प्रारूप तैयार किया गया है। साथ ही गणित को रोचक ढंग से पढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम भी बनाए गए हैं। प्रो. खरे के अनुसार भारतीय गणित परिषद अपने लगभग 4,000 सदस्यों से एक फार्म भरवाएगी, जिसमें उनसे पूछा जाएगा कि वे इस अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं या नहीं। चयनित विशेषज्ञों को एक सप्ताह का प्रशिक्षण देकर जिलों में मास्टर ट्रेनर के रूप में भेजा जाएगा, जो आगे गणित शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीक, ट्रिक्स और मैजिक आधारित गणित सिखाएंगे।

यूपी बोर्ड में गणित छात्रों की स्थिति

2026 की इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए जहां केवल 3.98 लाख छात्रों ने गणित विषय चुना है, वहीं 2023 में यह संख्या 4.99 लाख थी। चार वर्षों में यह पहली बार है जब गणित का नामांकन चार लाख से नीचे पहुंचा है। वर्ष 2026 के लिए कुल 24.79 लाख छात्रों ने नामांकन कराया है, जबकि 2025 में यह संख्या 27.05 लाख थी। एक ही वर्ष में 2.25 लाख छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।

गणित प्रयोगशाला पर करीब 10 हजार का खर्च

प्रो. एसएस खरे के अनुसार पहली बार माध्यमिक विद्यालयों में गणित की प्रयोगशाला स्थापित करने का सुझाव प्रदेश सरकार और यूपी बोर्ड को दिया जाएगा। एक प्रयोगशाला पर लगभग 10 हजार रुपये का खर्च आएगा, जिसमें कागज, प्लास्टिक आदि से बने विभिन्न मॉडल शामिल होंगे। फिलहाल ऐसी प्रयोगशालाएं आईआईटी और कुछ तकनीकी संस्थानों में ही मौजूद हैं, लेकिन यदि इन्हें माध्यमिक विद्यालयों में लागू किया जाए तो इसके सकारात्मक और दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं।

संबंधित समाचार