यूपी में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती: 14 जर्जर सेतुओं की मरम्मत के लिए 1298 करोड़ की दी गई मंजूर, हादसे रोकने और कनेक्टिविटी बढ़ाने की बड़ी पहल
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में सड़क और सेतु इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित एवं सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश के 14 सेतुओं की मरम्मत एवं अनुरक्षण कार्य के लिए 1297.90 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। यह कार्य लोक निर्माण विभाग के माध्यम से प्रदेश के 14 जिलों में कराया जाएगा।
शासनादेश के अनुसार, यह धनराशि राज्य योजना (सामान्य) के अंतर्गत सेतु अनुरक्षण मद से खर्च की जाएगी। शासन का उद्देश्य है कि समय से पहले जर्जर हो रहे पुलों की मरम्मत कर यातायात को सुरक्षित बनाया जाए और भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना की आशंका को रोका जा सके।
स्वीकृत परियोजनाओं के तहत आजमगढ़, चित्रकूट, बांदा, बस्ती, जालौन, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, उन्नाव और अमरोहा सहित कुल 14 जिलों में सेतुओं की मरम्मत, रीहैबिलिटेशन, एप्रोच रोड सुधार और सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाएंगे। इसमें कुआनो, सई, धसान, बागेन, गोमती, वान नदी और रामगंगा फीडर नहर पर बने सेतु शामिल हैं। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक परियोजना के लिए पहले विस्तृत आगणन (डीपीआर) तैयार कर सक्षम अधिकारी से तकनीकी स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद ही कार्य प्रारंभ किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इन कार्यों की किसी अन्य योजना के तहत दोहराव न हो।
गुणवत्ता, समयसीमा और पारदर्शिता पर जोर
लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी मरम्मत कार्य निर्धारित मानकों और स्वीकृत विशिष्टताओं के अनुरूप कराए जाएं। गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही पर संबंधित अभियंताओं की जिम्मेदारी तय की जाएगी। सभी कार्यों के लिए आवंटित धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2026 तक सुनिश्चित करना होगा और उपयोगिता प्रमाण पत्र 30 अप्रैल 2026 तक शासन को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार का मानना है कि इन 14 सेतुओं की मरम्मत से न केवल यातायात व्यवस्था सुरक्षित होगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ किसानों, व्यापारियों और औद्योगिक गतिविधियों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
