अयोध्या में सौंदर्यीकरण के बाद बदल गया गिरजा कुंड का लुक, बना आकर्षण का नया केंद्र  

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Published By Anjali Singh
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अयोध्या, अमृत विचार : फैजाबाद शहर से सटे जनकौरा गांव में स्थित गिरजा कुंड रामायणकालीन स्थल है। यहां स्थित मंत्रेश्वर महादेव का मंदिर इच्छित फल देने वाला माना जाता है। यह 14 कोसी परिक्रमा का पड़ाव स्थल भी है। पर्यटन विभाग ने इसका सौंदर्यीकरण कराया। इसका लुक बदल गया। अब यह आकर्षित करने वाला स्थल बन गया है। 

गिरजाकुंड के सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए काम मई 2023 में शुरू किया गया था। इसे जून 2025 में पूरा कर लिया जाना था। समय रहते काम लगभग पूरा हो पाया, लेकिन आसपास के लोगों को कहना है कि फिनिशिंग का काम अब तक बचा रह गया। 

प्रोजेक्ट में विश्राम गृह, शौचालय, पीने का पानी, खान पान की दुकानें, स्तंभ, प्रवेश द्वार, साइनेज, सीटिंग के साथ वाल बनाए जाने का प्रस्ताव था। यहां एक बड़ा कुंड है, जिसे गिरजा कुंड के नाम से जाना जाता है। यह रामायणकालीन है। पर्यटन विभाग से सौंदर्यीकरण के बाद कुंड के साथ पूरे परिसर का लुक जरूर बदल गया। जलकुंभी से पटा रहने वाले कुंड में अब साफ पानी दिखता है। हालांकि फिनशिंग को लेकर कई स्थानों पर खामियां दूर करने की जरूरत है।

राजा जनक पड़ाव स्थल रहा है जनकौरा

आर्ष पुस्तकों के मुताबिक राजा दशरथ के समय में राजा जनक जब भी जनकपुर से अयोध्या आते थे। उनका पड़ाव यहीं पड़ता था। यह एक प्रकार से अयोध्या में जनकपुर हुआ करता था। इसलिए इसका नाम भी अतीत में जनकौरा पड़ा। बाद में इसका अप्रभंश जनौरा हो गया। यहां कुंड के साथ भगवान शिव का जीवंत मंदिर हैं। यहां पर्व और त्योहारों के अलावा प्रतिदिन भगवान शिव की आराधना करने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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