लोकायन :पंजाब की फुलकारी, रंगों और परंपरा की कढ़ाई
फुलकारी पंजाब की फुलकारी एक प्रसिद्ध और अत्यंत प्रिय कढ़ाई कला है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा मानी जाती है। यह कला अपने जीवंत रंगों, बारीक हाथ की सिलाई और पारंपरिक प्रतीकों के लिए जानी जाती है। फुलकारी कढ़ाई में प्रायः रेशमी और रंगीन धागों का उपयोग किया जाता है। इसमें फूल, पत्तियां, जालियां, बेल-बूटे और कभी-कभी पशु-पक्षियों की आकृतियां उकेरी जाती हैं।
कपड़े की उलटी सतह से की गई है। यह कढ़ाई सामने की ओर जादुई और चमकदार रूप में उभरती है। यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी महिलाओं द्वारा सहेजी और आगे बढ़ाई गई है, जो उनके रचनात्मक कौशल और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
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फुलकारी केवल एक कढ़ाई कला नहीं, बल्कि पंजाब की स्त्री-परंपरा, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक निरंतरता का जीवंत प्रतीक है। बदलते समय के साथ आधुनिक डिजाइनों में ढलकर भी फुलकारी आज अपनी पारंपरिक आत्मा को बनाए हुए है और भारतीय हस्तकला की अमूल्य धरोहर के रूप में पहचानी जाती है।
फुलकारी कढ़ाई के प्रमुख प्रकार
पाक फुलकारी
यह फुलकारी की सबसे लोकप्रिय शैली मानी जाती है। इसमें कपड़े के अधिकांश हिस्से को घनी कढ़ाई से भर दिया जाता है। विभिन्न रंगों के धागों से फूलों और ज्यामितीय आकृतियों का निर्माण किया जाता है। यह शैली विशेष रूप से विवाह और उत्सवों में पहनी जाती है।
छम्मास फुलकारी
छम्मास फुलकारी में एक ही रंग के चमकीले धागे से बारीक टांकों का प्रयोग किया जाता है। कई बार इसमें सोने या चांदी के धागों का भी उपयोग होता है, जिससे कढ़ाई अत्यंत आकर्षक दिखाई देती है। इसका प्रयोग दुपट्टों और साड़ियों में किया जाता है।
घुंघट बाग फुलकारी
इस शैली में फूलों और पत्तियों की आकृतियां इस तरह बनाई जाती हैं कि वे घुंघट या बाग का आभास देती हैं। बहुरंगी धागों से सजी यह फुलकारी पारंपरिक पंजाबी महिलाओं में विशेष रूप से लोकप्रिय रही है।
सैंची फुलकारी
सैंची फुलकारी अपने प्राचीन रंगों और विविध डिज़ाइनों के लिए जानी जाती है। इसमें लाल, हरा, नीला, पीला और सफेद जैसे रंगों का सुंदर संयोजन होता है। इसका उपयोग परिधानों के साथ-साथ टेबल कवर और सजावटी वस्तुओं में भी किया जाता है।
चोपे फुलकारी
चोपे फुलकारी विवाह से जुड़ी एक विशेष शैली है। इसे पारंपरिक रूप से दुल्हन को भेंट किया जाता है। इसमें सीमित रंगों और नियमित पैटर्न का प्रयोग होता है, जो इसे गरिमामय और विशिष्ट बनाता है।
