भाजपा पर अखिलेश यादव का तीखा तंज, बोले- सरकार मनरेगा को खत्म करने की 'गोपनीय साजिश' बना रही
नई दिल्लीः समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने की कोशिश इस प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की एक "गोपनीय साजिश" रची गयी है।
गौरतलब है कि पिछले संसदीय सत्र में पारित नया कानून - विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन -ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) अधिनियम, 2025, मनरेगा की जगह ले रहा है। इस नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी दी गई है। इसका ध्यान बुनियादी ढांचे और परिसंपत्तियों के निर्माण पर है, जिसमें तकनीक का उपयोग, मजदूरी के लिए केंद्र-राज्य के बीच 60:40 का नया वित्तीय अनुपात, पारदर्शिता (बायोमेट्रिक/जियो-टैगिंग) और पीएम गति शक्ति जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों से ग्रामीण कार्यों को जोड़ने का प्रावधान है।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा एक सरकारी योजना थी, जो ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 100 दिनों के अकुशल मजदूरी कार्य की कानूनी गारंटी देती थी। इसका उद्देश्य आजीविका सुरक्षा बढ़ाना और सड़कों, तालाबों और जल संरक्षण संरचनाओं जैसे ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण करना था। यह न्यूनतम मजदूरी, पुरुष-महिला को समान वेतन और 15 दिनों के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता सुनिश्चित करती थी।
यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर एक बयान पोस्ट करते हुए कहा कि मनरेगा का नाम बदलने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि यह भाजपा की उस मंशा को दर्शाता है जिसके तहत इस योजना को गुपचुप तरीके से खत्म करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा, "मनरेगा का नाम बदलने से कुछ नहीं बदलेगा। असल में यह मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की भाजपा की गुप्त साजिश है।"
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कई तरीकों से इस योजना को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा, "एक तरफ भाजपा सरकार लगातार मनरेगा का बजट घटा रही है, दूसरी तरफ उसने राज्यों पर ऐसा वित्तीय दबाव बना दिया है कि केंद्र से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे में देरी और कमी के कारण पहले से खाली खजाने वाले राज्य यह सोचने को मजबूर हैं कि अतिरिक्त धन कहां से लाएं।"
यादव ने दावा किया कि इससे राज्य अंततः इस योजना को सीमित करने या छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे। सपा अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र ने सैकड़ों ग्राम सभाओं को 'शहरी श्रेणी' में डालकर मनरेगा को एक और झटका दिया है, जिससे वे ग्रामीण रोजगार निधि से वंचित हो गई हैं। उन्होंने कहा, "कई ग्राम सभाओं को शहरी श्रेणी में डालकर भाजपा सरकार ने उनका मनरेगा बजट भी छीन लिया है।"
यादव ने कहा, "भाजपा का असली लक्ष्य सिर्फ मनरेगा का नाम बदलना नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह 'राम-राम' कह देना है।" भाजपा की प्राथमिकताओं पर तंज कसते हुए उन्होंने जोड़ा, "भाजपा अपने अलावा किसी और का पेट भरते देख नहीं सकती।" विपक्षी दल लंबे समय से केंद्र पर मनरेगा के लिए अपर्याप्त बजट आवंटन और मजदूरी भुगतान में देरी के आरोप लगाते रहे हैं, हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और कहती है कि आवंटन मांग-आधारित है तथा आवश्यकता के अनुसार धन जारी किया जाता है।
इस मुद्दे को गरीबों के अधिकारों से जुड़ी बड़ी लड़ाई बताते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा, "आज के गरीबों को भाजपा की जरूरत नहीं है।" उन्होंने संकेत दिया कि आगामी चुनावों से पहले मनरेगा और कल्याणकारी खर्च विपक्ष के हमलों का प्रमुख मुद्दा बने रहेंगे।
