माघ मेले में आकर्षण का केंद्र बने बाबा शंकर खंडेश्वरी, 7 सालों से एक पांव में खड़े, दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु

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Published By Anjali Singh
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में इन दिनों देश के कोने-कोने से साधु-संत पहुंच रहे हैं। संगम तट पर आस्था, तप और साधना का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में अक्षय वट मार्ग पर एक नागा संन्यासी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण और कौतूहल का विषय बने हुए हैं। पंचदशनाम जूना अखाड़े से जुड़े नागा संन्यासी पुजारी नागा बाबा शंकरपुरी खंडेश्वरी बाबा पिछले सात वर्षों से एक पैर पर खड़े होकर कठिन तपस्या कर रहे हैं। 

26 वर्षीय नागा बाबा शंकरपुरी उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले स्थित नैमिषारण्य से माघ मेले में पहुंचे हैं। अक्षय वट मार्ग के किनारे बनी अपनी कुटिया में उन्होंने एक झूला लगाया है, जिसके सहारे वह एक पैर पर खड़े रहते हैं। इसी अवस्था में वह दिन-रात तपस्या करते हुए भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। बाबा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जो भी भक्त उनके पास आता है, उसे वे मोर पंख से आशीर्वाद देते हैं। 

और श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार बाबा को दक्षिणा या राशन सामग्री चढ़ावे के रूप में अर्पित करते हैं।नागा बाबा शंकरपुरी के अनुसार, उनका यह संकल्प जनकल्याण और मानवता के परोपकार के लिए है। बाबा ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि वह मात्र सात वर्ष की आयु में घर-परिवार त्यागकर संन्यास मार्ग पर चल पड़े थे। वर्ष 2013 के प्रयागराज कुंभ में उनका श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े में विधिवत संस्कार हुआ, जिसके बाद वे नागा संन्यासी बने। 

उनके गुरु श्री दिगंबर तोतापुरी जी महाराज हैं, जो हरदोई जिले के पिहानी स्थित बाबा मंगलेश्वर महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर हैं।नागा बाबा शंकरपुरी खंडेश्वरी संत का कहना है कि वह माघी पूर्णिमा तक माघ मेले में इसी प्रकार तपस्या करते रहेंगे और श्रद्धालुओं को दर्शन देते रहेंगे। बाबा की कठिन साधना को देखकर मेले में आने वाले श्रद्धालु हैरान रह जाते हैं। कई लोग उनके साथ फोटो और सेल्फी लेने की इच्छा जताते हैं, लेकिन बाबा केवल आशीर्वाद देकर सभी को धर्म और संयम के मार्ग पर चलने का संदेश देते हैं।

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