लखनऊ : केजीएमयू में धर्मांतरण मामले की जांच करेगी यूपी एसटीएफ

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : लव जिहाद और धर्मांतरण के मामले में किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) का विवादों से पीछा नही छूट रहा है। डॉ रमीज उद्दीन नायक की गिरफ्तारी के बाद सामने आ रहे उसके पीएफआई कनेक्शन के बाद मामले में आगे की जांच यूपी एसटीएफ ने अपने हाथ मे ले ली है। एसटीएफ पूरे मामले की जांच करने के साथ विवि परिसर में संचालित हो रही अन्य गतिविधियों को भी खंगालेगी। 

प्रकरण को यूपी एसटीएफ द्वारा हाथ मे लिए जाने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने पीड़ित छात्रा के मामले की जांच के लिए गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को भंग कर दिया है। विवि के मीडिया प्रभारी प्रो केके सिंह का कहना है कि विवि की तरफ से धर्मांतरण सहित पूरे मामले की जांच के लिए एसटीएफ से अनुरोध किया गया था। एसटीएफ ने जांच हाथ मे ले ली है। इसलिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी को भंग कर दिया गया है।

बता दें कि केजीएमयू से एमडी पैथोलॉजी कर रही एक छात्रा ने अपने वरिष्ठ पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण और धर्मांतरण का आरोप लगाया था। मामला के तूल पकड़ने के बाद प्रकरण की जांच के लिए केजीएमयू ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की थी। इस बीच पुलिस की तरफ से आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन नायक और उसके माता पिता को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में कुलपति प्रो सोनिया नित्यानंद ने एक प्रेस कांफ्रेंस में रेजिडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक को दोषी बताया है।

जांच में उसके खिलाफ फिजिकल, इमोशनल और मेंटल हरासमेंट के आरोप सही पाए गए। इसके आधार पर आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया है और निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुलपति सोनिया नित्यानंद ने कहा था कि उसे निष्कासित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस में प्रवेश नीट के जरिए और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत होता है, इसलिए निष्कासन की संस्तुति विभाग को भेजी गई है।

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