पूर्व राष्ट्रपति कोविंद 19 जनवरी को ‘रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स’ की करेंगे शुरुआत, इसमें 154 देश लेंगे भाग

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नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद 19 जनवरी को ‘जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक’ (रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स) की शुरुआत करेंगे। यह अपनी तरह का पहला वैश्विक सूचकांक है जो देशों का मूल्यांकन इस आधार पर करता है कि वे अपने नागरिकों, वैश्विक समुदाय और पृथ्वी के प्रति कितनी जिम्मेदारी से सत्ता का प्रयोग करते हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

‘जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक’ एक वैश्विक मूल्यांकन ढांचा है जिसे ‘थिंक टैंक’ ‘वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन’ (डब्ल्यूआईएफ) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के अकादमिक सहयोग से विकसित किया है और इसका पद्धतिगत सत्यापन मुंबई स्थित भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) ने किया है।

 ‘वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन’ के सचिव सुधांशु मित्तल के अनुसार, ‘जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक’ एक नयी वैश्विक चर्चा शुरू करना चाहता है—एक ऐसी चर्चा जो न केवल यह पूछे कि राष्ट्र कितने शक्तिशाली हैं, बल्कि यह भी कि वे कितनी जिम्मेदारी से कार्य करते हैं। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “वैश्विक मूल्यांकन के केंद्र में नैतिकता, स्थिरता और सहयोग को रखकर, ‘जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक’ का उद्देश्य 21वीं सदी में प्रगति और नेतृत्व के अर्थ को पुनर्परिभाषित करना है।”

 उन्होंने कहा, “ वैश्विक मूल्यांकन ढांचों में ‘जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक’ एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आधारित प्रदर्शन, प्रति व्यक्ति आय, व्यापार का स्तर, सैन्य व्यय, भू-राजनीतिक प्रभाव और प्रतिस्पर्धात्मकता से जुड़ी रैंकिंग जैसे पारंपरिक मापदंडों से आगे बढ़कर, ‘जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक’ राष्ट्रों का मूल्यांकन नागरिकों, पृथ्वी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति उत्तरदायित्व, नैतिक आचरण और प्रबंधन के दृष्टिकोण से करता है।” 

यह सूचकांक तीन प्रमुख आयामों पर आधारित है: आंतरिक उत्तरदायित्व, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और बाह्य उत्तरदायित्व। मित्तल ने कहा कि ‘जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक’ में 154 देश शामिल हैं और यह पारदर्शी, वैश्विक स्तर पर प्राप्त डेटा पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि जलवायु संकट, संघर्ष, असमानता और वैश्विक स्तर पर परस्पर निर्भरता के इस युग में, उत्तरदायित्व राष्ट्रीय वैधता का निर्णायक मापदंड बन गया है। मित्तल ने कहा कि ‘जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक’ एक अकादमिक और नैतिक ढांचा है, जिसका उद्देश्य चिंतन, संवाद और नीतिगत शिक्षा को बढ़ावा देना है।”  

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