नगर निगम में दो साल बाद भी ई-ऑफिस की व्यवस्था सिर्फ कागजों पर..., भ्रष्टाचार पर नहीं लग पा रही लगाम
निर्माण से लेकर भुगतान की फाइलें मैनुअल चल रहीं
लखनऊ, अमृत विचार : नगर निगम में ई-ऑफिस व्यवस्था करीब 1.5 वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं उतर पायी है। जुलाई 2024 में जोर-शोर से शुरुआत होने के बाद भी कर्मचारियों से लेकर अधिकारी ई-ऑफिस की जगह मैनुअल ही फाइल चला रहे हैं। निर्माण से लेकर भुगतान की फाइलें अभी भी मैनुअल ही की जा रही हैं।
नगर निगम के कार्यों में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए शासन के निर्देश पर 15 जुलाई से तीन विभागों अवस्थापना, अभियंत्रण और लेखा विभाग में ई-ऑफिस प्रणाली की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य जनता को सहूलियत देने के साथ फाइलें गुम होने से लेकर पटल पर रुकने की समस्या भी खत्म करना था।
बाबुओं को प्रशिक्षण मिल गया लेकिन कम्प्यूटर नहीं
करीब दो वर्ष पहले ही बाबुओं को ई-ऑफिस का प्रशिक्षण भी दे दिया गया था लेकिन कम्प्यूटर आज भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। अभी टेबल तक केवल इंटरनेट कनेक्शन पहुंचे हैं। दूसरी ओर अधिकारियों के पास कम्प्यूटर से लेकर ऑपरेटर भी उपलब्ध हैं। बाबू, एकाउंटेंट, अभियंता, विभागाध्यक्ष और अधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर भी बन गए हैं लेकिन ई-ऑफिस प्रणाली पर काम नहीं हो रहा है।
ई-ऑफिस प्रणाली के ये हैं फायदे
ई-ऑफिस प्रणाली से भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लग जाती। कोई भी कर्मचारी या अधिकारी फाइल निर्धारित समय से अधिक नहीं रोक सकता और न उसमें छेड़छाड़ कर सकता है। फाइल कहां लंबित है इसकी जानकारी एक क्लिक पर मिल जाती है। बैक डेट में फाइल तैयार नहीं की जा सकेगी।
