नवाचार और प्रसार से बढ़ेगा यूपी का 'पशुपालन': प्रशिक्षित किए जाएंगे चिकित्सक, बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादन से बढ़ाई जाएगी अर्थव्यवस्था
प्रशांत सक्सेना/लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश का पशुपालन विभाग नवाचार और प्रसार के माध्यम से अर्थव्यवस्था को गति देगा। इसके लिए 19 जनवरी से मथुरा वेटरनरी कॉलेज में प्रत्येक जिले से दो चिकित्सक पांच दिवसीय प्रशिक्षण पर भेजे जाएंगे। जो मास्टर ट्रेनर के तौर पर विशेषज्ञों द्वारा पशुओं के उपचार की नई तकनीक सीखेंगे।
पोल्ट्री फार्म, गोशाला, डेयरी आदि का भ्रमण करेंगे। सेवाओं और योजनाओं का पशुपालकों के बीच जाकर और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसार करने के तौर-तरीके सीखकर जिलों के संबंधित अधिकारी, पशु चिकित्सक, पशुधन प्रसार अधिकारी और पशुमैत्री को प्रशिक्षित करेंगे।
ये सभी पशुपालकों के बीच जाकर पशुओं की बेहतर देखभाल, कृत्रिम गर्भाधान, उनकी ग्रोथ, समय-समय पर टीकाकरण, सीमन, गंभीर बीमारी व घायल स्थिति में उनका उपचार आदि की जानकारी देंगे। साथ ही इन्हीं पशुओं से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध, अंडा, सीड, मांस व ऊन उत्पादन को बढ़ाने में सहयोग करेंगे।
इसके अलावा अन्य व्यवसाय जैसे गोबर से बनी खाद आदि से आय अर्जित करने के तरीके बताएंगे, क्योंकि उपचार में अच्छी व नई तकनीक और पशुपालकों की जागरूकता से पशु स्वस्थ रहेंगे। प्रसार में भी नई तकनीक अपनाई जाएगी। यह भी बताएंगे कि पशुओं का देशी इलाज न कराएं, बल्कि सरकारी चिकित्सकों को दिखाएं।
तीन बैच में जाएंगे 150 चिकित्सक, फोटो व वीडियो करेंगे शेयर
विभाग ने ''पशुपालकों एवं पशुपालन विभाग के कार्मिकों के लिए प्रशिक्षण एवं प्रसार योजना'' का विस्तार किया है। इस क्रम में तीन बैच में 50-50 चिकित्सक मथुरा जाएंगे। इनके लौटने पर ब्लॉकों पर बड़े व छोटे पशुओं का अलग-अलग 100-100 पशुपालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। अंडा, सीड, मछली, दूध, ऊन व मांस आदि का उत्पादन करने वाले पोल्ट्री संचालक व अन्य पालकों को भी प्रशिक्षित करेंगे। इन्हें प्रशिक्षण सामग्री देंगे। इसके अलावा प्रशिक्षण पर आधारित फोटो व वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से पशुपालकों तक पहुंचाई जाएगी।
वर्ष 2019 की 20वीं पशुगणना के अनुसार
- गोवंश 190.20 लाख
- महिषवंश 330.17 लाख
- भेड़ 9.85 लाख
- बकरी 114.8 लाख
- सूकर 4.09 लाख
