कहीं आपका बच्चा भी डिस्लेक्सिया या डिसग्राफिया से ग्रस्त तो नहीं

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Published By Anjali Singh
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हर माता-पिता की चाहत होती है कि उसके बच्चे की पढ़ाई-लिखाई दूसरे बच्चों से बेहतर हो, लेकिन कई बार कुछ बच्चों को अक्षर या स्पेलिंग पहचानने में कठिनाई होती है। उनका दिमाग सही अक्षर, रंग या आकृति नहीं पहचान पाता। बच्चा तेजी से लिखने में मुश्किल महसूस करता है। इस कारण वह अन्य बच्चों से अलग-थलग होने लगता है। इस समस्या को डिस्लेक्सिया या डिसग्राफिया कहते हैं। यह सीखने से जुड़ी एक ऐसी स्थिति होती है, जो पढ़ने और लिखने की क्षमता प्रभावित करती है।

अभिनेता आमिर खान ने ‘तारे जमीं पर’ फिल्म बनाकर बच्चों की इसी समस्या पर लोगों का ध्यान खींचा था, लेकिन अब ऐसे बच्चों की परेशानी आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इनक्यूबेशन और इनोवेशन सेंटर में इनक्यूबेटेड कंपनी क्यूट ब्रेंस ने दूर कर दी है। कंपनी ने एक ऐसा ऐप तैयार किया है, जिसकी मदद से डिस्लेक्सिया पीड़ित बच्चे आसानी से किसी भी चीज को जानने और समझने के साथ सीख सकते हैं। कंपनी का मानना है कि “हर बच्चा अलग तरीके से सीखता है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन विभिन्नताओं को पहचानें और उनका पोषण करें।”-राजीव त्रिवेदी,  कानपुर
 
तमाम बच्चों में न्यूरल डेवलपमेंट सामान्य बच्चों जैसा नहीं हो पाता है। क्यूट ब्रेन्स स्टार्ट अप के तहत आईआईटी कानपुर के ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर बृजभूषण द्वारा तैयार ऐप ‘एसेसटिव एप्लीकेशन फॉर चिल्ड्रेन विद डिस्लेक्सिया एंड डिस्ग्राफिया’ इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। यह बच्चों की सीखने की क्षमता, विकासात्मक विलंब और न्यूरोडाइवर्सिटी स्थितियों जैसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, एडीएचडी और डिस्लेक्सिया की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कंपनी का मानना है कि समय पर स्क्रीनिंग से तंत्रिका विकास संबंधी चुनौतियों को बढ़ने से पहले पहचानने में मदद मिलती है।

60 दिन के अभ्यास से दूर हो जाती समस्या

क्यूट ब्रेन्स के प्रतिनिधि बच्चों को एक टचस्क्रीन डिवाइस देते हैं, जिस पर बच्चों को पाठ्य सामग्री लिखकर या शब्द लिखते हुए अंगुली फेरनी होती है। बच्चों को आडियो-वीडियो विजुअल्स की मदद के साथ हेप्टिक लर्निंग (बार-बार अंगुली फेरना) का कांसेप्ट सिखाया जाता है। इस तरह के 60 दिनों के अभ्यास के बाद गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चे भी आसानी से पढ़ाई करने लगते हैं। फिलहाल कक्षा एक से लेकर पांचवीं तक के बच्चों के लिए यह ऐप और तकनीक काफी प्रभावी है।

किस तरह ले सकते हैं मदद

क्यूट ब्रेंस की वेबसाइट पर जाकर सीधे संपर्क कर सकते हैं। साइट पर दिया गया फॉर्म अभिभावक को भरकर जमा करना होता है। इसके बाद क्यूट ब्रेंस के प्रतिनिधि संवाद करते हैं। इस काम के लिए एक न्यूनतम फीस रखी गई है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले बच्चे की क्लीनिकल स्क्रीनिंग कराई जाती है।

क्यूट ब्रेन्स पठन-लेखन अक्षमता और सीखने की समस्या से जूझ रहे बच्चों बच्चों के प्रति सहानुभूति एवं सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए इनोवेटिव शैक्षिक जनसंपर्क आयोजित करती है, छात्रों और शिक्षकों को इंटरएक्टिव सत्रों के माध्यम से जोड़ती है ताकि डिस्लेक्सिया के बारे में भ्रम दूर किया जा सके। कंपनी बच्चों की सीखने की अक्षमताओं का पता लगाकर निदान करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

क्या होता है डिस्लेक्सिया

डिस्लेक्सिया एक (लर्निंग डिसआर्डर) सीखने संबंधी विकार  है, जो अक्सर बच्चों और यहां तक कि कई बार बड़ों में भी पढ़ने, लिखने और वर्तनी की समझ में कठिनाई पैदा करता है। इस बीमारी का तकनीक की मदद से प्रबंधन संभव है।

डिस्लेक्सिक बच्चों में यह होते लक्षण

-    वाणी का विकास देर से हो सकता है। नई शब्दावली समझने, वर्णमाला के अक्षरों को याद करने, दोहराने या सरल तुकबंदी करने में कठिनाई आ सकती है।
-   उन शब्दों और अक्षरों को बोलने में ज्यादा कठिनाई होती है, जिन्हें वे देखते हैं।
-    ऐसे बच्चों के लिए यह सामान्य बात है कि वे परिचित शब्दों में अक्षरों का गलत उच्चारण करें या उन्हें मिला दें।
-    साधारण कहानी या कविता की घटनाओं के अनुक्रम को पुनः याद करने में कठिनाई होती है। बच्चा इसे संक्षेप में प्रस्तुत करने में असमर्थता महसूस कर सकता है।
-    पढ़ने या लिखने के साथ होमवर्क पूरा करने में बहुत ज्यादा समय लगता है।
-    नंबर अनुक्रमों का पालन करने में कठिनाई हो सकती है। जोड़, घटाना, गुणा और भाग के अंकगणितीय प्रतीक उसे भ्रमित कर सकते हैं।
-    रंगों के नाम, सप्ताह के दिन या महीनों के नाम याद करने या समय बताना सीखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
-     स्कूल में खराब पढ़ने-समझने के कारण बच्चा दूसरे छात्रों से अलग-थलग रह सकता है।
-    बच्चा बहुचरणीय निर्देशों का पालन नहीं कर पाता है,‘बाएं’ या ‘दाएं’ दिशाओं के निर्देश में उसे कठिनाई हो सकती है।
-    ऐसे बच्चों को पेंसिल सही से पकड़ने में दिक्कत होती है। विराम चिन्हों, व्याकरण नियमों को याद करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस कारण उनकी लिखावट अस्पष्ट होती है। उन्हें लिखने में दूसरे बच्चों से ज्यादा समय लगता है।
-    सामान्य या उच्च बुद्धि होने के बावजूद ऐसे बच्चों को बात करते समय सही शब्द ढूंढने में कठिनाई होती है।

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