वैज्ञानिकों के आकर्षण का केंद्र होगा धूमकेतु-3 आई एटलस

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Published By Anjali Singh
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इस पूरे वर्ष बहुचर्चित धूमकेतु-3 आई एटलस वैज्ञानिकों के आकर्षण के केंद्र में रहेगा। दूसरी दुनिया से आए इस धूमकेतु की कौमा जैसी पूंछ का रंग अब हरा हो चला है। चौड़ाई में आकार 6 किमी तक है। यह एक असामान्य सक्रिय धूमकेतु है, जिसकी सतह पर संभवतः बर्फ के ज्वालामुखी विस्फोट हो रहे हैं। यह जानकारी नासा की हबल अंतरिक्ष दूरबीन के जरिए सामने आई है।- बबतू चंद्रा,नैनीताल

अंतरिक्ष में धूमकेतुओं का अपना अलग रोमांच है और वह धूमकेतु तब और भी रोमांच पैदा कर देता है, जब वह हमारे सौर मंडल का न होकर किसी दूसरी दुनिया से आया हो। यही वह मौका है, जो किसी दूसरे सौर मंडल के रहस्यों को उजागर कर सकता है। जिस कारण नासा और ईसा जैसी प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां गंभीरता से इसके ऑब्जर्वेशन में जुटी हुई हैं। अभी तक हुए अध्ययन के बाद इस धूमकेतु के बारे में कुछ नई जानकारियां सामने आ सकी हैं, जिससे पता चलता है कि इसका धूल भरा कौमा यानी पूंछ अब लाल रंग से हरे रंग में तब्दील हो चुकी है। 

चौड़ाई में इसका आकार 440 मीटर से 6 किमी के बीच होने का अनुमान वैज्ञानिकों ने जताया है। बहरहाल इसके आकार की सही जानकारी मिलनी अभी बाकी है। इसके रंग बदलने का कारण द्विपरमाण्विक कार्बन का उत्सर्जन माना जा रहा है। इस धूमकेतु की सतह में हलचल यानी सक्रियता अधिक हो रही हैं, जिस कारण इसे असामान्य माना जा रहा है। इसकी सतह पर बर्फ के ज्वालामुखी विस्फोट हो रहे हैं, इसके संकेत वैज्ञानिकों को मिले हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह धूमकेतु इस वर्ष जून तक जमीनी दूरबीनों से देखा जा सकेगा। 

इसके बाद साल के अंत में पुनः पृथ्वी पर मौजूद दूरबीनों से देखा जा सकता है। इस बीच अंतरिक्ष दूरबीन जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और हबल से इस पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा बृहस्पति ग्रह पर मौजूद दूरबीन जूसी भी इसकी निगरानी करेगा और इसकी तस्वीरें हम तक भेजेगा। वर्तमान में यह धुंधला ही नजर आ रहा है। जिस कारण साधारण दूरबीनों से देख पाना आसान नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस धूमकेतु के अध्ययन के लिए पूरा साल है, जो किसी दूसरी दुनिया के सौर मंडल की जानकारी दे जाएगा। 

धूमकेतुओं से पता चलता है सौर मंडल की वास्तविकता 

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे के अनुसार धूमकेतुओं से सौर मंडल के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है। यह किसी भी सौर मंडल के निर्माण के अवशेष होते हैं। जिस कारण सौर मंडल की आयु और वहां मौजूद पिंडों का पता लगाया जा सकता है, जिससे धूमकेतु-3 आई एटलस का महत्व बढ़ जाता है, जो किसी दूसरे सौर मंडल के बारे में जानकारी दे सकता है।