Bareilly : म्यूटेशन और पुराने बिलों से परेशान करदाताओं को बड़ी राहत

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। करदाताओं और म्यूटेशन के नाम पर वर्षों से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। महापौर डॉ. उमेश गौतम की अध्यक्षता में शुक्रवार को नगर निगम के कर विभाग के अधिकारियों और गृह कर मामलों में पारंगत कुछ पार्षदों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक का उद्देश्य करदाताओं से जुड़ी लंबित समस्याओं और उनके हित में आवश्यक सुधारों पर विचार करना था।

बैठक में पार्षद राजेश अग्रवाल ने सबसे अधिक बिंदुओं पर करदाताओं की समस्याएं उठाईं और विभाग की लंबित टालमटोल प्रक्रिया के बारे में अवगत कराया। महापौर ने सभी बिंदुओं पर तत्काल और करदाताओं के हित में निर्णय लेने के निर्देश दिए। बैठक में म्यूटेशन, पुराने बिलों का संशोधन, खाली और कमर्शियल भवनों पर कर, गलत नाम सुधार और बकाया कर व ब्याज की समस्या सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें सबसे अहम फैसला म्यूटेशन प्रक्रिया को लेकर लिया गया। 

तय हुआ कि म्यूटेशन के मामलों में करदाताओं को वर्षों तक भागदौड़ करने की आवश्यकता नहीं होगी और लंबित मामलों का निपटारा अब 45 दिन के भीतर कर दिया जाएगा। इसके साथ ही दो साल पहले जीआईएस के माध्यम से स्वकर फॉर्म भरने वाले करदाताओं के भवनों का पुनः पैमाइश नहीं की जाएगी। पुराने और गलत बिलों के संशोधन की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी और तय किया गया कि 2014 से लंबित गलत गृहकर के सभी बिल 30 दिन में संशोधित किए जाएंगे। 100 मीटर तक के भवनों पर बिना किसी निरीक्षण के कर छूट प्रदान की जाएगी, जबकि इसके ऊपर के भवनों में निरीक्षण के बाद ही कर निर्धारित होगा। इसके अलावा, खाली कमर्शियल भवनों पर अब केवल आवासीय कर लगेगा, ताकि करदाताओं को अनावश्यक परेशानी न हो।

बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन भवनों का बंटवारा हो चुका है और जिन पर कोई कर बकाया नहीं है, उनकी आईडी भवन स्वामियों में वितरित कर दी जाएगी। गलत नामों के कारण भवन नापने की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई। पार्षद राजेश अग्रवाल ने नगर निगम में बकाया कर और ब्याज की अधिकता की समस्या भी उठाई और कहा कि भवन का टैक्स कम है, लेकिन ब्याज अत्यधिक बढ़ा दिया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि नगर निगम को वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू करनी चाहिए। इसके बाद महापौर ने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी प्रदीप कुमार चतुर्वेदी को निर्देश दिए कि वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजें और इस मामले में वे स्वयं शासन में पैरवी करेंगे। बैठक में अन्य पार्षद जैसे सर्वेश रस्तोगी, मुकेश सिंघल और सलीम पटवारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने करदाताओं के हित में कई सुझाव साझा किए।

सिफारिशें काम नहीं आएंगी, संपत्तियां सील की जाएंगी
शहर में आठ हजार से अधिक करदाताओं ने करोड़ों रुपये का संपत्ति कर जमा नहीं किया है, जिनमें सभी एक लाख रुपये से अधिक के बकायेदार हैं। नगर निगम ने इन लोगों को कई बार नोटिस भेजे हैं, बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोग टैक्स जमा करने के बजाय सिफारिशें करवा रहे हैं। नगर आयुक्त संजीव कुमार ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति कर जमा न करने वालों को किसी भी हालत में छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अब संपत्तियों और व्यवसायिक भवनों को सील और कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। इधर, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी प्रदीप चतुर्वेदी ने भी साफ कहा कि बकायेदारों की नोटिस पर नोटिस दिए जाने के बाद भी अब कोई दलील या सिफारिश बकायदारों को बचा नहीं पाएगी।

 

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