संपादकीय : उल्लेखनीय उपलब्धि
नीति आयोग के लगभग 70 संकेतकों के आधार पर तैयार एक्सपोर्ट प्रीपेयर्डनेस इंडेक्स यानी निर्यात तैयारी सूचकांक में उत्तर प्रदेश का चौथा स्थान ऐतिहासिक उपलब्धि है। परंपरागत रूप से तटीय और औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात की निर्यात क्षमता अधिक होना स्वाभाविक है, लेकिन उत्तर प्रदेश का दो वर्षों में सातवें से चौथे पायदान तक पहुंचना दर्शाता है कि राज्य के निर्यात-समर्थ अवसंरचना और नीतिगत सुधार पर केंद्रित प्रयास सफल रहे हैं।
उत्तराखंड ने भी इस सूचकांक में छोटे राज्यों की श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया है, यह दर्शाता है कि सीमित भौगोलिक और संसाधन बाधाओं के बावजूद नीति-प्रेरित सुधार और बेहतर व्यापार वातावरण से कैसे सफलता पाई जा सकती है। हिमालयी राज्य ने निर्यात के लिए अनुकूल नीतियों तथा स्थानीय स्किलिंग पर ध्यान देकर यह सफलता हासिल की है। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश लैंडलॉक्ड राज्य होते हुए भी चौथे स्थान पर पहुंचा है।
पारंपरिक तटीय राज्यों की तुलना में यहां निर्यात-लॉजिस्टिक्स खर्च अधिक होने की समस्या है, लेकिन बेहतर रोड-कनेक्टिविटी, ड्राई पोर्ट और कंटेनर बेस्ड लॉजिस्टिक्स हब तथा लॉजिस्टिक्स सुधारों ने निर्यातकों को महत्वपूर्ण समर्थन दिया। बेशक यह सफलता उक्त प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के विजनरी नेतृत्व, नीति-निर्माण और सुशासन की क्षमता का परिणाम है। निर्यात सूचकांक में बेहतर रैंकिंग ने यह साफ किया है कि प्रदेश ने नीतिगत सुधारों, अवसंरचनात्मक निवेश तथा व्यापार-मैत्री वातावरण के निर्माण में उठाए महत्वपूर्ण कदम कारगर रहे और अब उत्तर प्रदेश देश के निर्यात मानचित्र पर ‘ग्लोबल हब’ के रूप में उभरने जा रहा है।
प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट-वन उत्पाद, कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स, माल भाड़ा व्यय प्रतिपूर्ति, गुणवत्ता प्रमाणीकरण सहायता तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग ने उत्पादकों और निर्यातकों को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लायक बनाया, तो उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसी पहल ने स्थानीय उत्पादकों को सीधे विदेशी खरीदारों से जोड़ने का अवसर दिया। पारंपरिक हस्तशिल्प, फार्मा, खाद्य प्रसंस्करण तथा कृषि वस्तुओं के निर्यात आदेशों में अपेक्षित वृद्धि दर्ज की गई। इन प्रयासों ने न केवल उत्पादों के निर्यात में मदद की, बल्कि प्रदेश के ब्रांड वैल्यू को भी वैश्विक स्तर पर मजबूती देने के साथ ही सूचकांक में सूचकांक के बिजनेस इकोसिस्टम, निर्यात अवसंरचना जैसे अवयवों में बेहतर स्कोर दिलाया।
निर्यात राज्यों की अर्थव्यवस्था के लिए आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन होता है। इससे विदेशी मुद्रा का संचय होने के अलावा व्यापार घाटा भी कम होता है और बाहरी निवेश आकर्षित होता है। हालांकि यह सूचकांक संबंधी उपलब्धि एकाकी प्रमाण नहीं है, पर यह संकेत अवश्य देता है कि नीति, अवसंरचना, तथा व्यापार सुविधाओं में सुधर स्पष्ट है और निर्यात वातावरण अधिक प्रतिस्पर्धी होता जा रहा है, जिसके चलते निर्यात प्रदर्शन को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स, सर्विस एक्सपोर्ट्स, टेक्नोलॉजी-आधारित उत्पादन तथा वैश्विक बाजारों में विविधीकरण पर निरंतर ध्यान आवश्यक है। उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के बेहतर प्रदर्शन से इन राज्यों में औद्योगिक निवेश एवं रोजगार अवसरों के बढ़ने की संभावना बनी है, जिससे राजस्व में वृद्धि होगी तो सामाजिक एवं बुनियादी सुविधाओं पर अधिक व्यय संभव होगा।
