फिल्म समीक्षा : हैप्पी पटेल
आमिर खान प्रोडक्शंस की यह फिल्म खुद को एक अलग और बेधड़क कॉमेडी-स्पाई पैरोडी के रूप में पेश करती है। हैप्पी पटेल पारंपरिक बॉलीवुड कॉमेडी नहीं है, बल्कि यह जानबूझकर अराजक, बेतुकी और “अनफिल्टर्ड” बनने की कोशिश करती है। यही वजह है कि फिल्म या तो आपको कुछ जगहों पर हंसाएगी, या फिर कई मौकों पर असहज और थका देगी। फिल्म की कहानी हैप्पी पटेल नाम के एक अजीब-से जासूस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भाषा, संस्कृति और हालात को समझने में बार-बार चूक करता है। यह गलतफहमियां फिल्म का मुख्य हास्य आधार हैं।
कहानी का ढांचा काफी ढीला है और इसमें कोई मजबूत स्पाई थ्रिल या ठोस प्लॉट नहीं मिलता। फिल्म ज्यादातर सीन-टू-सीन जोक्स, स्केच-जैसे एपिसोड्स और शॉक वैल्यू पर टिकी हुई है। वीर दास अपने किरदार में पूरी ऊर्जा झोंक देते हैं। उनका अभिनय अलग है, लेकिन लगातार ऊंची टोन, अराजक हरकतों और गाली-प्रधान संवादों के कारण किरदार कई बार ओवरडोज लगने लगता है।
मिथिला पालकर स्क्रीन पर फ्रेश दिखती हैं, मगर उनके किरदार को गहराई नहीं मिलती। शारिब हाशमी अपनी टाइमिंग और पंचलाइनों से कुछ सीन संभाल लेते हैं। मोना सिंह का रोल साफ तरह से डेवलप नहीं हो पाता। आमिर खान का कैमियो तो है, लेकिन प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहता है। निर्देशक की मंशा साफ है, एक बिंदास, सीमाएं तोड़ने वाली कॉमेडी बनाना, लेकिन समस्या यह है कि निर्देशन में संतुलन की कमी है। फिल्म कई जगहों पर यह तय नहीं कर पाती कि उसे स्मार्ट पैरोडी बनना है या सिर्फ शोर-शराबे वाली बेतुकी कॉमेडी।
तकनीकी रूप से फिल्म औसत है। कैमरा वर्क साधारण है, बैकग्राउंड म्यूजिक याद नहीं रहता और एडिटिंग ढीली है। कई सीन काटे जा सकते थे, जिससे फिल्म ज्यादा टाइट और असरदार बन सकती थी। फिल्म का सबसे विवादित पहलू इसकी अत्यधिक गाली-प्रधान भाषा है। कुछ जगह यह किरदारों की अराजकता दिखाने में काम आती है, लेकिन ज्यादातर मौकों पर गालियां सिर्फ जबरन हंसी निकालने का जरिया लगती हैं। उनकी अधिकता हास्य को कमजोर करती है और पारिवारिक दर्शकों के लिए फिल्म को लगभग असहज बना देती है।
हैप्पी पटेल एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म है जो हर दर्शक के लिए नहीं बनी। इसमें कुछ मज़ेदार पल हैं, लेकिन कमजोर कहानी, ओवरडोज गालियां और असंतुलित निर्देशन इसे पूरी तरह कामयाब नहीं होने देते। अगर आपको अनफिल्टर्ड, अजीब और बिना दिमाग लगाए देखने वाली कॉमेडी पसंद है, तो यह फिल्म आपको कुछ हंसी दे सकती है। अगर आप स्मार्ट, सधी हुई और पारिवारिक कॉमेडी ढूंढ रहे हैं, तो यह फिल्म शायद आपको निराश करेगी। समीक्षक -प्रदीप शर्मा
