यूपी के स्कूलों में फाइलेरिया की जानकारी: प्रार्थना सभा में बच्चों को बताएंगे शिक्षक, इन जिलों में चलेगा जागरूकता अभियान

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 21 जिलों के 64 ब्लॉकों में आगामी सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान को सफल बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग सक्रिय भूमिका निभाएगा। अभियान को जन-आंदोलन बनाने के उद्देश्य से बुधवार को बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) और खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) ने संकल्प लिया कि वे विद्यालयों की प्रार्थना सभा में छात्र-छात्राओं को फाइलेरिया (हाथीपांव) के बारे में जागरूक करेंगे, ताकि बच्चे यह संदेश घर-घर तक पहुंचा सकें। 

राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी ने 21 जिलों के बीएसए व बीईओ के साथ आयोजित वर्चुअल बैठक में कहा कि स्कूलों के माध्यम से समुदाय में जागरूकता बढ़ाना सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि बच्चों को इतनी जानकारी दी जाए कि वे अपने परिवार के सदस्यों से फाइलेरिया और दवा सेवन की आवश्यकता पर चर्चा करें। 

उन्होंने शिक्षक-शिक्षिकाओं से अपील की कि वे ग्रामीणों को दवा खाने के लिए प्रेरित करें और स्वयं तथा बच्चों को अपने सामने दवा खिलाकर भरोसा पैदा करें कि दवा सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि 10 फरवरी से शुरू होने वाले आईडीए अभियान में लोगों को तीन दवाएं दी जाएंगी। अभियान से पहले विद्यालयों में वाद-विवाद प्रतियोगिता, पोस्टर निर्माण और पेंटिंग प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को जागरूक किया जाएगा। 

उन्होंने सुझाव दिया कि अभियान के दो दिन पहले जनजागरूकता रैली भी निकाली जाए, जिससे छात्रों के साथ-साथ अभिभावक भी जागरूक हों। बैठक में निर्देश दिया गया कि 10 फरवरी को विद्यालय परिसर में दवा सेवन कराया जाए, अभियान की तिथियों को स्कूलों के ब्लैक बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाए और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सूचनात्मक वीडियो साझा किए जाएं। 

बेसिक शिक्षा विभाग के परामर्शदाता सलाउद्दीन खान ने सभी जिलों में इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। यह अभियान शाहजहांपुर, बलिया, बाराबंकी, उन्नाव, चित्रकूट, प्रतापगढ़, हरदोई, प्रयागराज, सोनभद्र, कौशांबी, अयोध्या, भदोही, लखनऊ, रायबरेली, अंबेडकरनगर, खीरी, पीलीभीत, औरैया, बांदा, फतेहपुर व बहराइच में चलेगा। अभियान में बताया जाएगा कि दवा खाली पेट न लें, यह दवा बीपी, डायबिटीज और गठिया के मरीजों के लिए सुरक्षित है, जबकि गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार और एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को दवा नहीं दी जाएगी।

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