बदायूं: उधार के अधिकारी, जिले में कैसे चले विकास गाड़ी
बदायूं, अमृत विचार। जिला जनपद स्तरीय अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। गांव के विकास योजनाओं की धुरी माने जाने वाले कई अधिकारियों का अभाव है। कई विभाग उधार के अधिकारियों के सहारे विकास की गाड़ी खींच रहे हैं। लेकिन हकीकत यह कि कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। दिल्ली व लखनऊ से चलने वाली योजनाएं गरीबों के चौखट पर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दे रही है। उधार के अधिकारियों के भरोसे विकास की गाड़ी कैसे चलेगी, यह सिस्टम पर सवाल खड़ा रहा है।
अधिकारियों की कमी के कारण सबसे अधिक विकास भवन स्थित विभाग प्रभावित हो रहे हैं। यहां पर मनरेगा उपायुक्त, जिला विकास अधिकारी, नेडा परियोजना निदेशक, दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, आजीविका मिशन और जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग यह ऐसे विभाग हैं, जो जिले के साथ गांव में विकास की धुरी माने जाते हैं। लेकिन यह विभाग लंबे समय से अधिकारियों की कमी के कारण जूझ रहे हैं।
मनरेगा डीसी उपायुक्त का पद पिछले नौ माह से खाली पड़ा है। करीब एक साल से जिला विकास अधिकारी की कुर्सी खाली पड़ी है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में पिछले तीन साल से किसी अधिकारी की तैनाती नहीं हुई है। ऐसा ही हाल दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग का है। यहां पर पिछले तीन साल से कोई अधिकारी नहीं आया है। हाल ही में आजीविका मिशन के पद पर कार्यरत बृजेंद्र शुक्ल की पदोन्नति हो जाने के बाद उनका स्थानांतरण अन्य जनपद के लिए हो गया। लेकिन किसी अधिकारी की तैनाती नहीं की गई। अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारी लालमन का दो माह पूर्व स्थानांतरण दूसरे जनपद में होने के बाद से विभाग की कुर्सी खली पड़ी है। जिले में अधिकारियों की कमी होने के कारण विकास का पहिया थम गया है।
एक अधिकारी पर कई-कई विभागों का बोझ
जिले में अधिकारियों के पद खाली होने की वजह से कार्यरत अधिकारियों पर कई कई विभागों का प्रभार है। परियोजना निदेशक चार-चार विभाग का प्रभार संभाल रहे हैं। पिछडा वर्ग कल्याण अधिकारी पर भी चार चार विभाग का प्रभार है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग पीलीभीत में कार्यरत अधिशासी अधिकारी के सहारे चल रहा है। कई कई विभागों का प्रभार होने की वजह से अधिकारी काम के बोझ से दबे नजर आ रहे हैं। अधिकारियों की कमी के कारण सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन सही तरीके से नही हो पा रहा है।
अधिकारियों की गैर मौजूदगी से फरियादी लौट रहे मायूस
जिले में अधिकारियों का लंबे समय टोटा है। विभागों में अधिकारियों की कुर्सियां खाली पड़ी है। देहात क्षेत्र से आने वाले फरियादियों को खाली कुर्सी देखकर निराशा हाथ लगती है। उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। या फिर उच्चाधिकारियों की दौड़ लगानी पड़ती है। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाता। डीएम अवनीश कुमार राय ने बताया कि जिले में अधिकारियों की कमी है। अधिकारियों के पद भरने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। अधिकारियों की तैनाती होते ही बहुत सी समस्याओं का स्वयं समाधान हो जाएगा।
