Bareilly : बवाल के दिन तौकीर ने जिस मकान को बनाया ठिकाना, वह होगा ध्वस्त
फाइक एन्क्लेव स्थित फरहत अली खां के मकान को ध्वस्त करने के बीडीए के आदेश पर मंडलायुक्त ने भी लगाई मुहर
राकेश शर्मा, बरेली अमृत विचार। शहर में 26 सितंबर को हुए बवाल के मुख्य आरोपी आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां के करीबी फरहत अली खां का फाइक एन्क्लेव स्थित सील 120 वर्ग मीटर का मकान ध्वस्त होगा। बवाल वाले दिन मौलाना ने इसी मकान में शरण ली थी। बेटे ने मकान बचाने के लिए बीडीए की ओर से जारी ध्वस्तीकरण के आदेश के विरुद्ध मंडलायुक्त कोर्ट में अपील की, लेकिन अपील खारिज हो गयी। जेल में बंद फरहत अली खां का बेटा मकान का नक्शा नहीं दिखा सका। प्रकरण में मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने सुनवाई करते हुए बीडीए की ओर से जारी हुए ध्वस्तीकरण आदेश में कोई अनियमितता नहीं मिलने पर अपील के साथ प्रस्तुत स्थगन प्रार्थना पत्र भी निरस्त कर दिया।
मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने अपील पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुनाया। इसमें कहा कि उप्र नगर योजना एवं विकास अधिनियम के अंतर्गत बीडीए के संयुक्त सचिव/सक्षम प्राधिकारी ने 7 नवंबर 2025 को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया। आदेश के विरुद्ध फरहत खां के बेटे मजहर अली ने अपील दाखिल की। मंडलायुक्त ने सुनवाई करते हुए अधिवक्ता के तर्कों को सुना। अपील पत्रावली देखी। वहीं, बीडीए के अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र के साथ बीडीए के समक्ष अपीलकर्ता की ओर से दिए प्रार्थना पत्र के माध्यम से प्रस्तुत साक्ष्यों की छायाप्रतियां एवं नोटिस की प्रति एवं अवैध निर्माण पर लगी सील की अभिरक्षा के संबंध में थानाध्यक्ष बारादरी को भेजे पत्र की प्रतिलिपि दाखिल कर तर्क दिया कि अपीलकर्ता ने फाइक एन्क्लेव कालोनी में बीडीए की स्वीकृति के बिना लगभग 120 वर्ग मीटर में भूतल, प्रथम तल व द्वितीय तल का निर्माण किया है। निर्माण का स्वीकृत मानचित्र बीडीए को न दिखाने पर 30 सितंबर 2025 को नोटिस जारी किया। 4 अक्टूबर को अनधिकृत भवन उप्र नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम के अन्तर्गत सील किया।
बीडीए के अधिवक्ता ने कहा कि वाद में सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर एवं 28 अक्टूबर की तिथियां नियत कीं। नियत तिथि 28 अक्टूबर को मजहर अली प्राधिकरण के समक्ष उपस्थित हुए। बैनामे एवं बिजली बिल की छायाप्रति प्रार्थना पत्र के माध्यम से दाखिल की। प्रार्थना पत्र में कहा कि नोटिस फरहत अली खां के नाम से है, जबकि मालिकाना हक अपीलकर्ता मजहर अली के पास है। इस पर क्षेत्रीय अभियंता ने 1 नवंबर को आख्या प्रस्तुत कर बताया कि मजहर अली ने प्रार्थना पत्र संग भवन की स्वीकृति संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया है। बैनामे की छायाप्रति प्रस्तुत की है, जिससे यह सिद्ध हुआ है कि भवन फरहत खां का न होकर उसके बेटे मजहर अली और मोईन अली खां का है। क्षेत्रीय अभियंता ने वाद में फरहत खां के स्थान पर मजहर अली व मोईन अली खान का नाम दर्ज करते हुए ध्वस्तीकरण आदेश पारित करने की संस्तुति की। बीडीए ने क्षेत्रीय अभियंता की आख्या के आधार पर बिना मानचित्र स्वीकृत कराए अनधिकृत निर्माण को उप्र नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27(1) के तहत ध्वस्त करने का आदेश पारित किया।
फरहत के बेटे का यह तर्क भी नहीं आया काम
फरहत खां के बेटे मजहर अली के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि बीडीए ने सुनवाई का अवसर दिए बिना 7 नवंबर 2025 को आदेश जारी किया। मकान बीडीए ने 30 सितंबर 2025 को सील किया, जबकि नोटिस में अपीलकर्ता के नाम के स्थान पर फरहत अली खां का नाम लिखा है। बीडीए को इस तथ्य से अवगत कराया कि मकान के स्वामी वह एवं उसका सगा भाई है। बीडीए ने जिस नाम से नोटिस जारी की, वह मकान के स्वामी नहीं हैं। मकान पर बीडीए की सील हटाने का अनुरोध किया। मकान के वास्तविक स्वामियों को न कोई नोटिस जारी किया और न ही सुनवाई एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया था।
