वॉट्सऐप अब फ्री नहीं? Meta ला रहा है पेड सब्सक्रिप्शन, खोजा कमाई का नया तरीक

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ/नई दिल्ली: वॉट्सऐप के 2.8 अरब+ ग्लोबल यूजर्स और भारत में करीब 80 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। ऐसे में कंपनी एक बड़ा बदलाव लाने जा रही है। Meta अब अपने सबसे पॉपुलर मैसेजिंग ऐप को मॉनेटाइज करने की नई रणनीति पर काम कर रहा है। इसका मतलब है कि स्टेटस और चैनल्स में आने वाले विज्ञापनों से छुटकारा पाने के लिए यूजर्स को पैसे देने पड़ सकते हैं।

Android Authority और WaBetaInfo जैसी रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp के नए बीटा वर्जन 2.26.3.9 (एंड्रॉयड) में कोड में ऐसे स्ट्रिंग्स मिले हैं, जो ऑप्शनल पेड सब्सक्रिप्शन की ओर इशारा करते हैं। इस सब्सक्रिप्शन से यूजर्स अपड़ेट टैब (स्टेटस और चैनल्स) में आने वाले सभी ऐड्स को हटा सकेंगे।

मुख्य बातें क्या हैं?

- कोर फीचर्स फ्री रहेंगे: प्राइवेट चैट्स, वॉयस/वीडियो कॉल्स, ग्रुप्स – ये सब पूरी तरह फ्री और ऐड-फ्री रहेंगे। बदलाव सिर्फ Updates टैब (स्टेटस + चैनल्स) पर होगा।

- पेड प्लान का फायदा: सब्सक्रिप्शन लेने पर स्टेटस स्क्रॉल करते समय कोई विज्ञापन नहीं दिखेगा – बिना इंटरप्शन के फ्रेंड्स/फैमिली के स्टेटस देख सकेंगे।

- फ्री यूजर्स को क्या?: बिना पेमेंट के स्टेटस/चैनल्स में ऐड्स दिखेंगे (जैसे यूट्यूब पर ऐड्स के बाद कंटेंट)। ऐड्स स्पॉन्सर्ड लेबल के साथ आएंगे और यूजर्स उन्हें मैनेज/ब्लॉक कर सकेंगे।

- कहां शुरू होगा?: शुरुआत यूरोपियन यूनियन (EU) और यूके से होगी – क्योंकि वहां सख्त प्राइवेसी नियमों (जैसे GDPR) के चलते Meta को ऐड-ट्रैकिंग के बजाय सब्सक्रिप्शन मॉडल ऑफर करना पड़ रहा है। कीमत लगभग ₹350-₹500 प्रति महीना हो सकती है।

- भारत और दुनिया में?: अभी सिर्फ बीटा में टेस्ट हो रहा है। भारत जैसे बड़े मार्केट में कब और कैसे रोलआउट होगा, ये कन्फर्म नहीं। Meta पिछले साल से ही स्टेटस और चैनल्स में ऐड्स टेस्ट कर रहा है, लेकिन प्राइवेट मैसेजेस में कभी ऐड्स नहीं आएंगे।

वॉट्सऐप 2009 में हुआ था लॉन्च 

पहले साल फ्री, फिर कुछ समय के लिए सालाना ₹55 चार्ज करता था। 2016 में Meta (तब Facebook) ने इसे पूरी तरह फ्री कर दिया था। अब सालों बाद फिर हाइब्रिड मॉडल (फ्री + ऐड्स या पेड ऐड-फ्री) लाने की तैयारी है – जैसा फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पहले से चल रहा है।

Meta का मकसद साफ है की ऐप चलाने का खर्च यूजर्स से वसूलना और रेवेन्यू बढ़ाना, बिना प्राइवेसी से समझौता किए। फिलहाल ये सिर्फ ट्रायल है – ऑफिशियल लॉन्च कब और कैसे होगा, ये आने वाले महीनों में पता चलेगा।

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