Rampur: दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुई रामपुर हाउंड नस्ल
रामपुर, अमृत विचार। सोमवार को दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना की पशु टुकड़ी में शामिल रहे डॉग रामपुर हाउंड फिर चर्चा में है। नस्ल को तैयार करने वाले नवाब अहमद अली खान बहादुर को शिकार का शौक था। रामपुर स्टेट गज़ेटियर में 1794 से 1840 तक शासन करने वाले चौथे शासक को महान शिकारी बताया गया है।
रामपुर हाउंड की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तेज रफ्तार और लंबी दूरी तक बिना थके दौड़ने की क्षमता है। यह कुत्ता 60 किमी प्रति घंटे की गति से 5-6 किलोमीटर तक दौड़ सकता है। इसकी खोपड़ी छोटी, गर्दन लंबी, और चौड़ा सीना होता है। शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की अधिकता के कारण यह बेहद फुर्तीला और शक्तिशाली शिकारी होता है। यह तेंदुआ और भेड़िया का सामना करने में सक्षम है।
रामपुर हाउंड की ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए भारत सरकार ने 2005 में इस पर डाक टिकट जारी किया था। इसके अलावा मध्यप्रदेश पुलिस ने इसे अपने डॉग स्क्वाड में शामिल किया है। दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में भी यह नस्ल पाई जाती है। सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर इरशाद अली खां ने 2021 में इस नस्ल को वर्ल्ड डॉग फेडरेशन में पंजीकृत कराया, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
जापान के म्यूजियम में संरक्षित हैं रामपुर हाउंड की पेंटिंग्स
जापान स्थित टोक्यो के योकोयामा ताइकन मेमोरियल संग्रहालय में रामपुर हाउंड से जुड़ी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मृति संरक्षित है। इस संग्रहालय में आधुनिक जापानी चित्रकला के दिग्गज कलाकार योकोयामा ताइकन की कृतियां हैं। भारत की यात्रा के दौरान रामपुर के नवाब ने योकोयामा ताइकन को सम्मान के रूप में रामपुर हाउंड नस्ल के कुत्ते उपहार में दिए थे। ताइकन इन कुत्तों से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने अपनी पेंटिंग्स में इन्हें चित्रित किया। उनके द्वारा बनाई गई रामपुर हाउंड की पेंटिंग्स आज भी संग्रहालय के संग्रह का हिस्सा मानी जाती हैं।
इंग्लैंड व अफगानिस्तान की नस्ल से विकसित हुआ था रामपुर हाउंड
ग्राम प्रधान संगठन के महासचिव काशिफ खां ने बताया कि इंग्लैंड व अफगानिस्तान की नस्ल से रामपुर हाउंड विकसित हुआ था। रामपुर के चौथे शासक नवाब अहमद अली खान बहादुर ने इस विशेष कुत्ते को इंग्लैंड के 'ग्रेहाउंड' और अफगानिस्तान की 'ताजी' नस्ल के क्रॉस प्रजनन से विकसित किया था। तभी से इसका नाम 'रामपुर हाउंड' पड़ा।
