UP: संभल हिंसा मामले में मोहम्मद आलम को मिली सशर्त अग्रिम जमानत
विधि संवाददाता,प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल हिंसा से जुड़े मामले में मोहम्मद आलम को 25 फरवरी, 2026 तक सशर्त अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान की है। कोर्ट ने 50,000 रुपए के व्यक्तिगत मुचलके तथा समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर याची को रिहा करने का निर्देश दिया। उक्त आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने दिया, साथ ही राज्य सरकार से मामले में जवाबी हलफनामा भी मांगा है।
मालूम हो कि संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आलम के पिता की याचिका पर कथित पुलिस फायरिंग के आरोप में कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। बता दें कि आलम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आलम निर्दोष है। प्रारंभिक एफआईआर में उसका नाम नहीं था और उसे पुलिस फायरिंग में गोली लगने से चोट आई थी, जिसके लिए उसका उपचार कराया गया। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि आलम को पुलिस फायरिंग से कोई गोली लगने की चोट नहीं आई, जबकि बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की। राज्य की ओर से एजीए रूपक चौबे ने जमानत याचिका का विरोध किया और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
गौरतलब है कि आलम के पिता यामीन की याचिका पर सीजेएम विभान्शु सुधीर ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अपने 11 पृष्ठ के आदेश में सीजेएम ने कहा था कि पुलिस आपराधिक कृत्यों के लिए ‘आधिकारिक कर्तव्य’ की आड़ नहीं ले सकती और किसी व्यक्ति पर गोली चलाना आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं माना जा सकता।
न्यायालय ने पुलिस रिपोर्ट को संदिग्ध बताते हुए उसे चिकित्सा साक्ष्य के विपरीत पाया, जिसमें गोली लगने के घाव और दंगे के दौरान पुलिस फायरिंग का स्पष्ट उल्लेख था। याचिका के अनुसार घटना के समय आलम संभल के कोट मोहल्ले में जामा मस्जिद के पास ठेला लगाकर रस्क और बिस्कुट बेच रहे थे, जब कथित तौर पर पुलिस ने भीड़ पर फायरिंग की। याचिका में संभल सर्कल अधिकारी अनुज चौधरी और कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर को नामित किया गया था। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाए जाने के आधार पर निष्पक्ष जांच को आवश्यक बताया था।
