डिस्कॉम के निजीकरण को गति देना चाहती है सरकार, उपभोक्ता परिषद ने लगाया आरोप
लखनऊ। केंद्रीय बजट में बिजली क्षेत्र के लिए किसी बड़े बेल-आउट पैकेज की घोषणा न होने के बीच 16वें वित्त आयोग (2026-31) की रिपोर्ट को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया है कि सरकार पहले डिस्कॉम के निजीकरण को गति देना चाहती है और उसके बाद ही वित्तीय राहत की योजना पर अमल होगा।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने मंगलवार को कहा कि वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट में राज्यों को बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के निजीकरण की दिशा में सक्रिय प्रयास करने की सिफारिश की है। साथ ही सुझाव दिया है कि निजी निवेशकों को पुराने कर्ज के बोझ से बचाने के लिए राज्य विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) बनाकर संचित ऋण उसमें समाहित कर सकते हैं।
आयोग ने यह भी अनुशंसा की है कि केंद्र सरकार राज्यों को ऋण के पूर्व या अंतिम पुनर्भुगतान पर विशेष प्रोत्साहन योजना के तहत सहायता दे सकती है। रिपोर्ट के अनुसार राज्यों पर बिजली सब्सिडी का बोझ तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2018-19 में जहां कुल सब्सिडी 1.29 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 2.62 लाख करोड़ रुपये हो गई।
इसके अलावा 2022-23 में घाटे की भरपाई के लिए 43,600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त अनुदान दिया गया। आयोग ने इन आंकड़ों के आधार पर संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता बताई है। परिषद के अध्यक्ष एवं सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी (सीईआरसी) के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया निजी घरानों को लाभ पहुंचाने की दिशा में कदम है।
उनका आरोप है कि पहले सार्वजनिक धन से डिस्कॉम का कर्ज समायोजित किया जाएगा और फिर उन्हें निजी कंपनियों को सौंप दिया जाएगा। परिषद ने पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार से पुनर्विचार की मांग करने की बात कही है।
