20 घंटे हाउस अरेस्ट की इंसाइड स्टोरी : आसान नहीं था अलंकार को मनाना, इस तरह लखनऊ जाने पर हुए राजी

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। अलंकार अग्निहोत्री बार-बार मनाने के बाद भी अपने फैसले पर अडिग रहे तो पुलिस प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गयीं। राज्य सरकार के विरुद्ध अलंकार अग्निहोत्री के हमला करने से प्रशासन पर उन्हें मनाने का दबाव भी बढ़ गया। जब चीजें हाथ से निकलने लगी तब पुलिस प्रशासन ने एडीएम कंपाउंड स्थित सिटी मजिस्ट्रेट के आवास पर अलंकार को हाउस अरेस्ट करने की योजना बनायी।

बुधवार की शाम करीब 6 बजे से उन्हें एडीएम कंपाउंड से बाहर नहीं निकलने दिया गया। गेट पर ताला लगाकर कड़ी सुरक्षा बैठा दी गयी। अंदर और बाहर पीएसी तैनात कर दी। इस बीच कई बार अलंकार ने गेट के अंदर से मीडिया से बात करते हुए खुद को हाउस अरेस्ट रखने का आरोप लगाया। उन्हें एडीएम कंपाउंड से बाहर नहीं निकलने दिया। करीब 20 घंटे हाउस अरेस्ट रखकर प्रशासन अलंकार अग्निहोत्री को लखनऊ भेजने के लिए मना सका।

पुलिस-प्रशासन के अफसरों ने बुधवार दोपहर पहले ब्राह्मण समाज के नेताओं से बात की, उन्होंने पल्ला झाड़ लिया तो अफसरों ने स्वयं मोर्चा संभाला। दोपहर करीब दो घंटे में अलंकार को बाहर भेजने के लिए माहौल तैयार किया गया। प्रभारी नगर मजिस्ट्रेट राम जन्म यादव ने करीब 12 बजे मीडिया को यह बताया था कि पीसीएस अधिकारी को बरेली से बाहर भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद एडीएम कंपाउंड में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। 

जहां पर सिटी मजिस्ट्रेट का आवास है एक उस तरफ और एक मुख्य गेट की तरफ कैमरा लगाया। फिर एक-एक कर गाड़ियां मंगाई गयीं। इसके बाद पुलिस प्रशासन के अफसरों ने करीब डेढ़ घंटे तक निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट से सरकारी आवास पर बातचीत की। ब्राह्मण समाज के नेता और बार एसोसिएशन के सचिव भी उस वक्त मौजूद रहे। इस दौरान एडीएम कंपाउंड को छावनी में तब्दील कर दिया। उन्होंने करीब 11 बजे गेट के अंदर से मीडिया से बातचीत करते हुए यह कहा था कि प्रशासन ने उन्हें बाहर निकलने से मना किया है। वह प्रशासन के नियम का पालन कर रहे हैं।

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