Bareilly : 20 करोड़ के जीएसटी फ्राड का मास्टरमाइंड गाजियाबाद से गिरफ्तार

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
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मेरठ का रहने वाला है आरोपी योगेश शर्मा, गिरोह के एक सदस्य को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है पुलिस

बरेली/बिथरी चैनपुर, अमृत विचार। क्राइम ब्रांच और बिथरी चैनपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने फर्जी फर्म और कूटरचित दस्तावेज के सहारे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की चपत लगाने वाले गिरोह के मुख्य साजिशकर्ता मेरठ के योगेश शर्मा को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। योगेश पर लगभग 20 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का फर्जी दावा करने का आरोप है। जांच में पता चला है कि गिरोह खाली ट्रकों और नकली कागजों के सहारे माल की सप्लाई दिखाता था, लेकिन वास्तविक लेनदेन कहीं नहीं होता था।

पुलिस के अनुसार पकड़ा गया आरोपी योगेश मेरठ के ग्राम छजुपुरा का रहने वाला है। जांच में सामने आया है योगेश ने अपने साथियों मनीष अग्रवाल, गौरव अग्रवाल (निवासी बरेली), अपर्णा अग्रवाल और आदी उर्फ युगांश बिसारिया के साथ मिलकर बरेली में ''श्री श्याम ट्रेडर्स'' नाम की फर्जी फर्म बनाई थी। सिर्फ इसी एक फर्म के जरिये करीब 14 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा पहुंचाया गया। इस मामले में राज्य कर अधिकारी अविनाश दीक्षित ने बिथरी चैनपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। एसआईटी के मुख्य विवेचक निरीक्षक संजय कुमार धीर ने बताया कि गिरोह के एक अन्य सदस्य गौरव अग्रवाल को 25 जनवरी को ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब योगेश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और हवाला कारोबारियों की तलाश में जुट गई है। योगेश के पास से पुलिस ने जो मोबाइल फोन बरामद किया है, इसमें भारी मात्रा में फर्जी इनवॉइस, ई-वे बिल और व्हाट्सएप चैट मिली है। चैट से पता चला है कि यह गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में अपनी फर्जी फर्मों का जाल फैलाए हुए था। मोबाइल डेटा इतना अधिक है कि अब पुलिस इसका फॉरेंसिक टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है।

कागजों पर माल, असल में खाली ट्रक
पुलिस की पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह जीएसटी फ्रॉड गिरोह केवल कागजों का खेल खेल रहा था, असल में माल की सप्लाई बिल्कुल नहीं होती थी। दस्तावेजों में सब कुछ दिखाया जाता, ट्रकों के रूट, ई-वे बिल और इनवॉइस बनाए जाते, लेकिन वास्तविक में गाड़ियां खाली चलती थीं और माल कहीं नहीं जाता था। ऐसे नकली रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज बनाने के लिए गिरोह किराये की दुकानों का इस्तेमाल करता था, फिर कुछ समय बाद उनका पता बदल देता था, ताकि विभाग की निगाहों से बचा जा सके। नकदी और फर्जी लेनदेन के पैसों को ठिकाने लगाने के लिये हवाला नेटवर्क का सहारा लिया जाता था, जिससे पैसा अंततः कई हाथों से गुजरकर वापस प्राप्त किया जाता था।

गाजियाबाद के पॉश अपार्टमेंट से हुई गिरफ्तारी
एसएसपी बरेली अनुराग आर्य के निर्देशन में गठित क्राइम ब्रांच की टीम ने बैंक ट्रांजेक्शन और साइबर एनालिसिस के आधार पर योगेश शर्मा को ट्रेस किया। पुलिस ने उसे गुरुवार देर शाम गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडीपी सवाना अपार्टमेंट के गेट से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक योगेश पिछले कई सालों से इस संगठित अपराध को अंजाम दे रहा था। गिरफ्तारी वाली टीम में क्राइम ब्रांच के मुख्य विवेचक संजय कुमार धीर, बिथरी थाने के सहायक विवेचक इन्तजार हुसैन, सर्विलांस सेल से उप निरीक्षक सतेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल सतेंद्र कुमार, विकास कुमार और अंकुर शर्मा शामिल है।

फर्जी फर्मों के राष्ट्रीय नेटवर्क को बड़ा झटका : एसएसपी
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि विवेचना के दौरान जुटाए गए तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल डेटा और हवाला इनपुट की जांच के आधार पर सामने आया है कि यह गिरोह कई जिलों और राज्यों में फर्जी कंपनियों के माध्यम से जीएसटी में भारी धोखाधड़ी कर रहा था। इसके नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे सिंडीकेट की गहराई तक पहुंच बनाई जा रही है। आरोपी के अन्य सहयोगियों की पहचान के लिए टीमें दबिश दे रही हैं। जांच एजेंसियों का लक्ष्य ऐसे संगठित आर्थिक अपराधों को जड़ से खत्म करना है और ऐसे नेटवर्कों को तोड़ना है जो जीएसटी प्रणाली का दुरुपयोग कर सरकार को नुकसान पहुंचाते हैं।

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