बरेली: बच्चों को बांट दिए घटिया क्वालिटी के स्वेटर, हल्की ठंड के लायक भी नहीं
अमृत विचार, बरेली। सरकारी स्कूल के बच्चों को विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया क्वालिटी के स्वेटर बांट दिए गए हैं। कड़ाके की ठंड से बचाना तो दूर ये स्वेटर हल्की ठंड रोकने के लायक भी नहीं हैं। अधिकारियों की इस लापरवाही के खिलाफ अब विभिन्न शिक्षक संघ भी उतर आए हैं। उन्होंने भी स्वेटरों …
अमृत विचार, बरेली। सरकारी स्कूल के बच्चों को विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया क्वालिटी के स्वेटर बांट दिए गए हैं। कड़ाके की ठंड से बचाना तो दूर ये स्वेटर हल्की ठंड रोकने के लायक भी नहीं हैं। अधिकारियों की इस लापरवाही के खिलाफ अब विभिन्न शिक्षक संघ भी उतर आए हैं। उन्होंने भी स्वेटरों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उनका कहना है कि इतनी घटिया क्वालिटी के स्वेटर बांटने से तो अच्छा था कि बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों को अच्छी क्वालिटी के इनर ही दे देता। वहीं, विभाग की ओर से अभी तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। साथ ही स्वेटर वितरित करने वाली कंपनियों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
बता दें कि परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए स्वेटर वितरण में रोज एक नया काला खेल सामने आ रहा है। पहले पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को एक ही साइज के स्वेटर बांट दिए गए। अब इन स्वेटरों की गुणवत्ता परखी गई तो वह भी घटिया निकली। स्वेटर पाने वाले सरकारी स्कूल के बच्चों ने बताया कि उन्हें जब स्वेटर मिले तो बहुत खुशी हुई मगर इन्हें पहनने के बाद उन्हें ठंड से कोई राहत नहीं मिली। इन स्वेटरों के ऊपर जब तक कोई गर्म कपड़ा न पहनो तब तक ठंड से राहत ही नहीं मिलती।
वहीं, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि इन स्वेटरों की क्वालिटी इतनी खराब है कि इनके आर-पार सब नजर आता है। स्वेटर एकदम पतले बनाए गए हैं। उनका आरोप है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकरियों ने पैसे बचाने के चक्कर में गुणवत्ता से खिलवाड़ किया है। उन्होंने निर्धारित बजट से कम में स्वेटर खरीदकर शासन से वाहवाही लूटनी चाही। इसलिए इनकी गुणवत्ता खराब मिली है। जब पहले यही जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपी गई थी तो अधिकारियों ने हजारों कमियां गिना डाली थीं मगर अब अधिकारियों ने खुद स्वेटर के लिए फर्म का चयन किया तो उन्होंने सत्यापन में सब कुछ ठीक दिया।
200 रुपये दे रही थी सरकार, 178 रुपये में क्यों खरीदा स्वेटर
शिक्षक संघों के पदाधिकारियों का आरोप है कि जब शासन से बच्चों के स्वेटर के लिए 200 रुपये की धनराशि निर्धारित की गई थी तो 178 रुपये कीमत का स्वेटर क्यों खरीदा गया? उन्होंने शासन को यह दिखाने की कोशिश की है कि उनके जिले में कम रुपयों में भी अच्छी गुणवत्ता का स्वेटर मिलता है। इसलिए इनके सत्यापन में भी सब कुछ ठीक दिखा दिया गया।
बच्चों की बात
मुझे स्वेटर मिला तो काफी अच्छा लगा मगर पहनने के बाद इसमें ठंड लगती रहती है। ऐसा लगा रहा है कि कुछ पहना ही नहीं है। – लवकुश, कक्षा पांच
पहले तो छोटे स्वेटर दे दिए जो हाथों को भी सही से नहीं ढंक पा रहे हैं। इन्हें पहनो तो ठंड लगती रहती है। इनसे बिल्कुल भी ठंड नहीं जाती। – वीरेश, कक्षा सात
मैंने जब स्वेटर पहना तो फिट ही नहीं आया। बिल्कुल पतला स्वेटर दिया गया है। इसे पहनने के बाद भी ठंड लगती रहती है। – छाया, कक्षा छह
स्वेटरों की गुणवत्ता का भी सत्यापन हो चुका है। यदि स्कूल को इससे आपत्ति है तो वह लिखित में हमारे पास शिकायत कर सकता है। – विनय कुमार, बीएसए
