विवादों में घिरा लखनऊ प्रीमियर लीग, स्थानीय खिलाड़ियों ने लगाए गंभीर आरोप, जानें क्या बोले
लखनऊ, अमृत विचार: लखनऊ प्रीमियर लीग के आयोजन को लेकर क्रिकेट जगत में विवाद खड़ा हो गया है। क्रिकेट एसोसिएशन लखनऊ (सीएएल) की ओर से आयोजित इस लीग में शहर के स्थानीय और युवा खिलाड़ियों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
लखनऊ क्रिकेट डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष हैदर रज़ा ने आरोप लगाया कि सीएएल ने लखनऊ प्रीमियर लीग के नाम पर युवाओं को बड़ा सपना दिखाया, लेकिन चयन प्रक्रिया में उनके साथ अन्याय किया गया। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के चयन के लिए आयोजित ट्रायल में पंजीकरण के नाम पर प्रति खिलाड़ी 1000 रुपये लिए गए, लेकिन ट्रायल में भाग लेने वाले और चयनित बताए गए कई खिलाड़ियों के नाम नीलामी प्रक्रिया में दिखाई ही नहीं दिए। सोसाइटी अध्यक्ष ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्थानीय क्रिकेट संघों की ओर से लीग का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन अन्य जिलों की लीगों में लखनऊ के खिलाड़ियों को मौका नहीं दिया जाता। इसके विपरीत, लखनऊ प्रीमियर लीग में बाहर के शहरों के खिलाड़ियों को शामिल किया जा रहा है, जो राजधानी खिलाड़ियों के साथ सीधा अन्याय है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि यह तर्क दिया जा रहा है कि बाहर के खिलाड़ी लखनऊ के किसी क्लब से पंजीकृत हैं, इसलिए उन्हें खेलने का मौका दिया गया। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जो खिलाड़ी अब भी अपने मूल जिलों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और लखनऊ की ओर से बाहरी प्रतियोगिताओं में भाग नहीं लेते, उन्हें लखनऊ की लीग में फ्रैंचाइज़ी के माध्यम से पैसा देकर खिलाने का क्या औचित्य है। लखनऊ क्रिकेट डेवलपमेंट सोसाइटी ने मांग की है कि नीलामी में सी-ग्रेड की श्रेणी में रखे गए शहर के युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता के आधार पर लखनऊ प्रीमियर लीग में खेलने का अवसर दिया जाए, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का उचित मंच मिल सके।
