बजट 2026 : विकास की राह पर बजट... लेकिन कई अपेक्षाएं रहीं अधूरी

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में बजट 2026 पेश किया, जिसे लेकर सुबह से ही घरों, दुकानों, शोरूम, होटलों और गली-मोहल्लों की दुकानों पर लोग टीवी स्क्रीन से बजट की हर घोषणा पर नजर बनाए हुए थे। शहर के उद्यमी, व्यापारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट बजट के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण कर रहे थे। कर कटौती, निवेश प्रोत्साहन, ग्रामीण और शहरी विकास योजनाओं औरआर्थिक सुधारों पर चर्चा गर्म रही।

बजट को लेकर व्यापारियों का कहना है कि छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए कोई राहत नहीं दी गई, जबकि आम लोगों को आयकर में अधिकतम 20 प्रतिशत तक छूट की उम्मीद थी। आयकर स्लैब में कोई बदलाव न होना और पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कोई कमी न होना कई वर्गों को निराश कर गया। इसके अलावा दुर्घटना और स्वास्थ्य बीमा, कंपोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ाने, जीएसटी रिटर्न और नोटिस प्रक्रिया को सरल बनाने, ऑनलाइन कारोबार पर निगरानी और कच्चे माल के सापेक्ष उत्पाद पर जीएसटी समायोजन जैसी उम्मीदें भी पूरी नहीं हुईं। 

कर चोरी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान स्वागत योग्य रहा, लेकिन उद्यमियों और आम लोगों की बड़ी अपेक्षाएं अधूरी रह गईं। बजट में कुछ सकारात्मक पहल भी हैं। उद्यमियों ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर के लिए दस हजार करोड़ रुपये का आवंटन उद्यमिता को बढ़ावा देगा और छोटे व्यवसायियों को विस्तार के अवसर देगा। चिकित्सकों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों की दवाओं के दाम घटाने का कदम आम मरीजों के लिए राहत भरा बताया। वहीं, बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई और रेल में रियायती टिकट पर कोई कदम न उठाना निराशाजनक रहा। चार्टर्ड अकाउंटेंटों का कहना है कि बजट ने कुछ क्षेत्रों में उम्मीदें पूरी की हैं, लेकिन कई वर्गों की आकांक्षाएं अभी भी अधूरी रह गई हैं।

जरी जरदोजी पर कोई घोषणा न होने से मायूसी
आम बजट में कपड़ा उद्योग को लेकर कई घोषणा की गई हैं, पर जिले की पहचान जरी जरदोजी को अछूता रखा गया है। इससे कारीगरों को मायूसी हाथ लगी है। जिले में शहर से लेकर देहात तक कारखानों में बड़ी संख्या में लोग जरी जरदोजी का काम करते हैं। कुछ समय से जरी जरदोजी का कारोबार ठप हो गया है। जरी जरदोजी को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है। फिर भी इसके दिन नहीं बदल सके हैं। कारोबारी महेश बताते हैं कि आम बजट में जरी जरदोजी को लेकर काफी उम्मीदें थी। सरकार ने कपड़ा उद्योग पर तो ध्यान दिया पर जरी जरदोजी के कारोबार पर नहीं। इससे जिले के लाखों लोगों में काफी हताशा है।

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