157 वर्ष का हुआ लखनऊ का ऐतिहासिक बलरामपुर अस्पताल, एक साल में 35 लाख मरीजों को मिला उपचार

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊः लखनऊ का ऐतिहासिक बलरामपुर अस्पताल अपनी स्थापना के 157 वर्ष पूरे होने पर तीन फरवरी को स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। इस अवसर पर "विरासत से विश्वास तक" टैग लाइन के तहत विशेष पद्मश्री डॉ. एस.सी. राय ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा। जिसमे पद्मश्री डॉ राजेन्द्र प्रसाद का व्याख्यान होगा।

अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या ने जानकारी दी कि समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह शामिल होंगे। कार्यक्रम में चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कई अहम विकास कार्यों की भी जानकारी साझा की जाएगी। डॉ. आर्या के अनुसार अस्पताल में आधुनिक एमआरआई मशीन की खरीद प्रक्रिया चल रही है। आने वाले वर्ष में पीजीआई की तर्ज पर पूरी व्यवस्था को डिजिटल किया जाएगा, जिससे पर्ची कंप्यूटर पर बनेगी और जांच रिपोर्ट भी सीधे सिस्टम पर उपलब्ध होंगी। इससे मरीजों को लंबी कतारों और बार-बार काउंटर बदलने की परेशानी से राहत मिलेगी।

उन्होंने बताया कि डायलिसिस यूनिट की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। जहां पहले छह मशीनें थीं, अब इसे बढ़ाकर 15 किया जा रहा है। एनएचएम के अंतर्गत पहले लगभग 14 मशीनें थीं, जबकि वर्तमान में कुल संख्या 60 तक पहुंच चुकी है,जो पहले करीब 30 के आसपास रहती थी। मरीजों के बढ़ते दबाव को दर्शाते हुए निदेशक ने बताया कि पिछले एक वर्ष में लगभग 10 लाख नए मरीज अस्पताल पहुंचे, जबकि कुल ओपीडी संख्या करीब 35 लाख रही। इसी अवधि में इमरजेंसी में 1.25 लाख मरीजों को उपचार दिया गया।

उन्होंने बताया कि एक साल में 48 लाख पैथोलॉजी जांच और 9,915 सीटी स्कैन व 30,000 अल्ट्रासाउंड किये गए हैं। जबकि आईपीडी (भर्ती मरीज) 43,682 रही। उन्होंने बताया कि ऊर्जा संरक्षण की दिशा में भी अस्पताल ने बड़ी प्रगति की है। सोलर प्लांट की क्षमता पहले जहां करीब 150 केजी थी, अब बढ़कर 650 केजी हो चुकी है।इसके साथ ही लावारिस मरीजों के लिए बने विशेष वार्ड की क्षमता 30 बेड की है, जिसमें वर्तमान में 16-17 पुरुष मरीज भर्ती हैं, जबकि शेष बेड महिला मरीजों के लिए आरक्षित हैं।

डॉ. आर्या ने कहा कि 157 वर्षों की इस यात्रा में बलरामपुर अस्पताल ने विरासत को संजोते हुए आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ जनता का विश्वास मजबूत किया है। आने वाले समय में डिजिटल सेवाओं, उन्नत जांच सुविधाओं और विस्तारित उपचार इकाइयों के जरिए मरीजों को और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का लक्ष्य रखा गया है।

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