मुरादाबाद: नियमों में बदलाव से संविदा शिक्षकों की बढ़ी उलझन
मुरादाबाद, अमृत विचार। शासन ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कई विषयों को पढ़ाने के लिए स्नातक में चुनिंदा विषयों का होना अनिवार्य कर दिया है। मगर अभी तक ऐसा नहीं था। नए नियमों में केजीबीवि में पूर्णकालिक पदों पर सिर्फ महिला शिक्षकों की तैनाती का प्रावधान बनाया गया है। जबकि नियमों में बदलाव …
मुरादाबाद, अमृत विचार। शासन ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कई विषयों को पढ़ाने के लिए स्नातक में चुनिंदा विषयों का होना अनिवार्य कर दिया है। मगर अभी तक ऐसा नहीं था। नए नियमों में केजीबीवि में पूर्णकालिक पदों पर सिर्फ महिला शिक्षकों की तैनाती का प्रावधान बनाया गया है।
जबकि नियमों में बदलाव होने से पहले महिला शिक्षकों के अभाव में पुरुष शिक्षकों को भी कस्तूरबा विद्यालयों में पढ़ाने के लिए वरीयता मिल जाती थी। पर अब नियमों में हुए बदलाव संविदा शिक्षकों की गले की फांस बन रहे हैं। जिसके चलते शुक्रवार को नए नियमों के बदलावों ने जिले के 19 शिक्षकों की गर्दन पर तलवार लटका दी है।
पिछले 10 से 15 सालों से संविदा पर कस्तूरबा विद्यालयों में नौकरी कर रहे शिक्षकों की नैया जैसे भंवर में फंस गई है। असंगत विषयों में भिन्नता पाए जाने पर विभाग ने जांच बैठाई तो पहले 19 शिक्षक और शिक्षिकाएं इसकी गिरफ्त में आ गए। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इन शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। ऐसे में अब शिक्षकों में रोष है। कई शिक्षक कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।
बता दें कि जिले के कस्तूरबा बांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में 75 संविदा शिक्षकों की तैनाती है। इसमें से कई शिक्षक तो ऐसे हैं, जो पिछले दस से 15 सालों से इन विद्यालयों में संविदा पर नौकरी कर रहे हैं। लेकिन, शासन ने संविदा की शर्तों में परिवर्तन कर दिया है, जिससे कई शिक्षकों की संविदा समाप्त होने की कगार पर आ गई है। बीएसए योगेंद्र कुमार का कहना है कि नए नियमों के अनुसार केजीबीवि विद्यालयों में नियमित विषयों पर केवल महिला शिक्षक ही तैनात हो सकती है। मगर, पहले महिला शिक्षकों के अभाव में पुरुष शिक्षकों की तैनाती की गई थी, नए नियम के आने से छह पुरुष शिक्षकों की संविदा समाप्त हो गई है।
शिकार हुईं शिक्षिकाओं को मिल सकती है राहत
मामले की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी आंनद वर्धन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी ने ऐसी महिला शिक्षकों के प्रत्यावेदन दोबारा मांगे हैं, जिनकी संविदा स्नातक में विषय न होने के कारण समाप्त हो रही है। प्रत्यावेदन स्वीकार होने से कुछ शिक्षकों को राहत मिल सकती है। गठित कमेटी में बेसिक शिक्षा अधिकारी, डायट प्राचार्य, डीआइओएस के अलावा जिलाधिकारी के द्वारा नामित अधिकारी शामिल है।
अन्य संविदा शिक्षकों के दस्तावेजों की भी होगी जांच
डायट प्राचार्य प्रवेश कुमार ने बताया कि फिलहाल कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में तैनात 75 संविदा शिक्षकों में से 19 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हुई, जिसमें वह नए नियमों के मानकों पर अपात्र पाए गए। इसी क्रम में गठित कमेटी अन्य संविदा शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच करेगी।
