जॉब का पहला दिन
वर्ष 2001 को मैं शिक्षण संस्थान (गौरव टाइपिंग इंस्टिट्यूट), ईदगाह कॉलोनी में अपनी टाइपिंग मशीन पर अभ्यास कर रहा था। तभी लगभग सायं 6:00 बजे शिक्षक/मार्गदर्शक बनारसी तिवारी जी ने खुशखबरी दी कि मेरा चयन समूह ‘घ’ भर्ती परीक्षा 2001 के अंतर्गत तहसील कानपुर देहात में आशुलिपिक पद पर हो गया है। उन्होंने बताया कि दिनांक 1 दिसंबर को मूसानगर, कानपुर देहात में मुख्यमंत्री की रैली में नियुक्ति-पत्र प्राप्त होगा। यह समाचार सुनकर हम सभी ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दीं और रात 9:00 बजे घर लौट आया।
1 दिसंबर की सुबह 6:00 बजे तैयार होकर संस्थान पहुंचा। वहां मेरे साथ उसी संस्थान के अन्य चयनित साथी भी उपस्थित थे। 6:15 बजे सफेद रंग की एम्बेसडर कार आई, जिसमें जिला अधिकारी कार्यालय, कानपुर देहात में कार्यरत वरिष्ठ लिपिक हमें लेने आए। हम कार से ईदगाह कॉलोनी से निकलकर शहर पार करते हुए घाटमपुर तहसील पहुंचे और वहां से सामान्य लिपिक कलेक्टरेट को साथ लेकर मूसानगर के लिए रवाना हुए। रास्ते में उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि रैली में उच्च अधिकारी उपस्थित रहेंगे, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है, जैसा बताया जाए, वैसा ही करना है।
कुछ समय बाद मुख्यमंत्री रैली में पहुंचे। जनता का अभिनंदन अत्यंत दर्शनीय और उल्लासपूर्ण था। रैली के दौरान ही नियुक्ति-पत्र वितरण आरंभ हुआ। पहले मेरे एक साथी का नाम पुकारा गया, फिर मुझे मंच पर बुलाया गया। जब माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने हाथों से मुझे नियुक्ति-पत्र प्रदान किया, तो वह क्षण मेरे लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय था। उन्होंने सभी को बधाई देते हुए परिश्रम और लगन से कार्य करने की सीख दी।
रैली समाप्त होने के बाद हम उसी मार्ग से लौट आए। 2 दिसंबर को रविवार होने के कारण विश्राम किया। अगले दिन ज्वाइनिंग के लिए आवश्यक कागज तैयार कराए। निर्देश मिला कि मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र बनवाकर, आवश्यक अभिलेखों सहित उप जिलाधिकारी, रसूलाबाद कार्यालय में योगदान प्रस्तुत करना है। एक मोटरसाइकिल सवार की सहायता से मैं सायं 5:40 बजे उप जिलाधिकारी महोदय के आवास पहुंचा और नियुक्ति-पत्र व अभिलेख प्रस्तुत किए। अनुमति मिलने पर जॉइनिंग रिपोर्ट टाइप कराने का निर्देश मिला।
कार्यालय में जॉइनिंग रिपोर्ट टाइप की। समय 6:00 बजे के आसपास हो गया, इसलिए अंतिम बस पकड़ने की सलाह दी गई। मैं रोडवेज बस से कानपुर लौटा। थकान के कारण रास्ते में नींद आ गई और रात 9:30 बजे कानपुर पहुंचकर घर पहुंचा। यह मेरी नौकरी की पहली यात्रा थी बिना किसी परिजन या मित्र के। आज नौकरी करते हुए 24 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, पर वह पहला दिन और उसकी संघर्षपूर्ण यात्रा आज भी स्मृतियों में जीवित है।-नयन कुमार सोनकर, ओ.एस.डी., जिलाधिकारी कानपुर नगर
