लखनऊ : 6 माह बाद भी शिक्षकों को नहीं मिला चयन वेतनमान, अधिकारियों की लापरवाही से अध्यापक हो रहे परेशान

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार : प्राथमिक विद्यालयों में अधिकारियों की लापरवाही से समय सीमा के 6 माह बीत जाने के बाद भी शिक्षकों को चयन वेतनमान का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नियमानुसार शिक्षकों की 10 वर्ष संतोषजनक सेवा पर चयन वेतनमान का लाभ दिए जाने का प्रावधान है।

लेकिन लखनऊ समेत कई जिलों में ऑनलाइन चयन वेतनमान मॉड्यूल पर शिक्षकों के वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में हो रही देरी पर शिक्षक आक्रोशित हैं। कुछ जिलों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा चयन वेतनमान संबंधी आदेश होने के बाद भी वित्त व लेखा अधिकारी स्तर पर कार्य न होने से शिक्षक बेबस है और आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

राजधानी लखनऊ सहित झांसी, एटा, सहारनपुर, रामपुर जौनपुर, हरदोई, अमरोहा, इटावा सहित कई जिलों में अधिकारियों की लापरवाही के चलते चयन वेतनमान नहीं लगे हैं। लखनऊ में तो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आदेश जारी होने पर भी शिक्षकों को चयन वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया। शिक्षकों की चिंता है चयन का एरियर बढ़ने से आगामी वित्तीय वर्ष इनकम टैक्स की छूट लिमिट 12 लाख 75 हजार क्रॉस हो जाएगी, जिससे उन्हें पूरा टैक्स देना होगा और लगभग 70 से 80 हजार का नुकसान होगा।

सितंबर माह में ही लगना था वेतन

कुल 29334 विज्ञान गणित व 72 हजार प्राथमिक शिक्षकों के 10 वर्ष सितंबर अक्टूबर में पूरे हुए थे। शिक्षकों ने सुनवाई न होते देख उच्च अधिकारियों तक शिक्षकों ने गुहार लगाई, जिसको देखते हुए 29 दिसंबर 2025 को अपर मुख्य सचिव द्वारा प्रदेश स्तरीय बैठक में नाराजगी व्यक्त करते हुए चयन वेतनमान न लगाने पर अधिकारियों को कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी, लेकिन अधिकारियों ने शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं की। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने कहा कि शासन द्वारा इन अधिकारियों पर जवाबदेही तय न होने से आंदोलनात्मक स्थिति उत्पन्न होती है।

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