थाने के CCTV  फुटेज गायब होने पर हाईकोर्ट सख्त कहा-'एक बार घटना, दो बार संयोग, तीन बार दुश्मन की कार्रवाई'

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज मांगे जाने पर अलग-अलग मामलों में एक ही जैसे जवाब कि 'कैमरे काम नहीं कर रहे थे' पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पहले तो जेम्स बॉन्ड फिल्म का एक डॉयलॉग दोहराते हुए कहा कि 'एक बार कुछ होता है तो वह घटना है, दो बार वही घटना संयोग होती है लेकिन तीसरी बार वही घटना दोहराई जाए तो यह दुश्मन की कार्रवाई है।

कोर्ट ने कहा कि कैमरों में तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि ये फिक्शनल स्टोरी ज्यादा प्रतीत होती है। इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने थानों में सीसीटीवी के फेल हो जाने के मामलों की जांच मुख्य सचिव को करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तिथि नियत करते हुए, स्पष्ट किया है कि यदि अगली सुनवाई तक जांच रिपोर्ट न दाखिल हुयी तो मुख्य सचिव को हाजिर होना होगा। 

उक्त आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन व न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ श्याम सुंदर अग्रहरी की याचिका अपर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब भी थानों से सीसीटीवी फुटेज मांगी जाती है तो एक ही जवाब मिलता है कि कैमरे बंद थे या खराब थे। इससे यह प्रतीत होता है कि अधिकारियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज को समय पर प्रस्तुत नहीं करने का प्रयास किया जा रहा है। 

कोर्ट ने यूपी पुलिस के इस व्यवहार को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन करार दिया। इस मामले में याची जो एक विकलांग व्यक्ति है, उसे हत्या के प्रयास के कथित मामले में फर्जी तरीके से फंसाने तथा सुल्तानुपर के मोतीगरपुर थाने में उसे टॉर्चर किए जाने का आरोप याचिका में लगाया गया है।

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