बरेली: अम्मा प्रधान और बेटे कर रहे मनरेगा में काम
अमृत विचार, बरेली। शासन स्तर से महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना इसलिए चलाई गई ताकि श्रमिकों को काम मिल सके लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हो पा रहा है। दरअसल, प्रधानों की मनमानी इस पर हावी हो गई है। इसका ताजा उदाहरण भुता ब्लॉक का गांव बरखेड़ा है। यहां की ग्राम प्रधान ने अपने …
अमृत विचार, बरेली। शासन स्तर से महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना इसलिए चलाई गई ताकि श्रमिकों को काम मिल सके लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हो पा रहा है। दरअसल, प्रधानों की मनमानी इस पर हावी हो गई है। इसका ताजा उदाहरण भुता ब्लॉक का गांव बरखेड़ा है। यहां की ग्राम प्रधान ने अपने चारों बेटे के जॉब कॉर्ड मनरेगा योजना के तहत बनवा दिए। इसकी शिकायत गांव के लोगों ने अधिकारियों से की थी, लेकिन अफसरों ने जांच ही नहीं की।
गांव के लोग काम की तलाश में बाहर न जाएं और गांव में ही उन्हें रोजगार मिल सके। इसी कारण शासन स्तर से ग्रामीण इलाकों में मनरेगा योजना शुरू की गई। योजना के तहत प्रत्येक कामगार को 100 दिन काम देने का प्रावधान है, लेकिन ग्राम प्रधानों और रोजगार सेवकों की मनमानी के कारण लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे लोग गैर प्रांतों में रोजगार के लिए भटक रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर ग्राम प्रधान अपने ही बच्चों के जॉब कार्ड बनवाकर उन्हें काम में दर्शा रहे हैं। भुता ब्लॉक के गांव बरखेड़ा निवासी यशपाल सिंह, राजेश कुमार सिंह और पिंकू सिंह ने बताया कि उनके गांव में ग्राम प्रधान गीता देवी हैं। गीता देवी ने अपने चारों बेटों के जॉब कार्ड बनवा दिए हैं। जबकि अभी वे लोग संयुक्त परिवार में रहते हैं। उन्होंने बताया कि अधिनियम 2005 के तहत ग्राम प्रधान अपने बच्चों और परिजनों को मनरेगा में काम नहीं दे सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने अधिकारियों से शिकायत भी, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। बताया कि जांच हो तो तमाम अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
गांव में चल रहे मनरेगा कार्यों की देखरेख होती है। यदि कोई व्यक्ति काम नहीं कर रहा है और प्रधान व रोजगार सेवक उसकी हाजिरी लगवा रहे हैं, तो यह गलत है। इसकी जांच की जाएगी। -गंगाराम – डीसी मनरेगा
