Bareilly: वैलेंटाइन डे पर बोले शहाबुद्दीन...दूसरे धर्म की संस्कृति अपनाना इस्लाम में नाजायज

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। प्यार का पर्व वैलेंटाइन डे भारत में भी धूम है। मगर धर्म और संस्कृति की आड़ लेकर हिंदू संगठन जहां इसका विरोध कर रहे हैं, तो मुस्लिम उलमा भी पीछे नहीं। बरेली के मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने वैलेंटाइन डे को नाजायज करार दिया। वहीं बांग्लादेश के आम चुनावों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि हर दौर में कौमों की पहचान उनकी आस्था और संस्कृति से होती है। जब कोई कौम मानसिक गुलामी का शिकार हो जाए तो वो दूसरों के अकीदा और मजहब अपना लेने के बराबर होता है। इसी को वैलेंटाइन डे कहते हैं। इस तरह के कार्यक्रमों की इस्लाम धर्म में कोई जगह नहीं, बल्कि ये इस्लाम के खिलाफ है।

मौलाना ने कहा कि शरियत की रौशनी में वैलेंटाइन डे मनाना नाजायज है। लिहाजा पैगंबर-ए-इस्लाम ने कहा कि हया (आंखों का पर्दा) का ख्याल रखो। हदीस का हवाला देते हुए कहा कि जो कौम दूसरे धर्म की संस्कृति अपनाती है, उसको उसी के साथ शुमार किया जाएगा। मैं तमाम मुस्लिम नौजवान लड़के और लड़कियों से गुजारिश करूंगा कि शरियत के हुक्म को माने और वैलेंटाइन डे हरजिग न मनाएं।

बांग्लादेश ने कट्टरपंथी जमात को नकारा
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बांग्लादेश चुनाव पर कहा कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष तारिक रहमान हुकूमत बनाने जा रहे हैं, ये चुनाव अवामी लीग पार्टी के बगैर हुआ है। चूंकि इस पार्टी पर यूनुस हुकूमत ने प्रतिबंध लगा दिया था। बंगलादेश की अवाम ने कट्टरपंथी विचारधारा पार्टी जमात-ए-इस्लामी को नकार दिया और बीएनपी को समर्थन दिया। अब बीएनपी मुखिया तारीक रहमान के उपर जिम्मेदारी बनती है कि वह अल्पसंख्यको की हिफाजत करें। 15 महीनों में अल्पसंख्यको पर अत्याचार हुआ, उनकी मॉबलिंचिंग की गई। इन तमाम घटनाओं पर रोक लगाना बहुत जरूरी है।

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