हीमोग्लोबिन सामान्य... फिर भी गर्भवती की सांस फूले तो कराएं दिल की जांच, कॉर्डिकॉन 2026 में विशेषज्ञों ने लोगों को दी चेतावनी

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार : गर्भावस्था के दौरान यदि किसी महिला का हीमोग्लोबिन स्तर सामान्य है, फिर भी उसे सांस फूलने की शिकायत हो रही है, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। यह दिल की बीमारी, विशेषकर वॉल्व संबंधी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। यह जानकारी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के लारी कार्डियोलॉजी विभाग की डॉ. मोनिका भंडारी ने दी।

शनिवार को अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कॉर्डिकॉन 2026 में उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि पहले से हृदय के वॉल्व में सिकुड़न या लीकेज है तो सांस फूलना, अत्यधिक थकान और धड़कन तेज होना जैसे लक्षण उभर सकते हैं। समय रहते स्त्री रोग विशेषज्ञ और हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर जांच करानी चाहिए, ताकि मां और शिशु दोनों सुरक्षित रह सकें।

वॉकाथान से दिया स्वस्थ जीवनशैली का संदेश

लारी विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि सेठी ने कहा कि धूम्रपान, तली-भुनी व फास्ट फूड का सेवन, मानसिक तनाव और शारीरिक निष्क्रियता दिल की सेहत के लिए खतरनाक हैं। युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने नियमित जांच, संतुलित आहार और प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम की सलाह दी।
डॉ. अक्षय प्रधान ने बताया कि सुबह घंटाघर से केजीएमयू तक वॉकाथान का आयोजन किया गया, जिसमें डॉक्टरों, कर्मचारियों और आम लोगों ने हिस्सा लिया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।

महिलाओं में बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा

डॉ. प्रवेश विश्वकर्मा ने बताया कि कामकाजी जीवन और बढ़ते तनाव के कारण महिलाओं में भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। एस्ट्रोजन हार्मोन का असंतुलन, जंक फूड, धूम्रपान और शराब का सेवन प्रमुख कारण हैं। पहले यह जोखिम मुख्यतः मीनोपॉज के बाद देखा जाता था, लेकिन अब कम उम्र में भी मामले सामने आ रहे हैं।

20 वर्ष के बाद कराएं नियमित जांच

डॉ. अखिल शर्मा ने सलाह दी कि 20 वर्ष की आयु के बाद लिपिड प्रोफाइल, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हार्मोन स्क्रीनिंग, थायराइड और हीमोग्लोबिन की जांच हर वर्ष करानी चाहिए। समय पर जांच से हृदय रोगों की शुरुआती अवस्था में पहचान संभव है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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