मुरादाबाद: एक वार्ड में सर्वे पूरा, 40 फीसद अधिक मिले घर

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मुरादाबाद,अमृत विचार। महानगर के मकानों को सेटेलाइट से जोड़ने के लिए सर्वे चल रहा है। लखनऊ की जिस एजेंसी को इस सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह दो महीने में एक वार्ड का सर्वे कर पायी है। सर्वे में निगम के पास जो मकानों की संख्या दर्ज है, उससे 40 फीसद अधिक मकान सामने …

मुरादाबाद,अमृत विचार। महानगर के मकानों को सेटेलाइट से जोड़ने के लिए सर्वे चल रहा है। लखनऊ की जिस एजेंसी को इस सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह दो महीने में एक वार्ड का सर्वे कर पायी है। सर्वे में निगम के पास जो मकानों की संख्या दर्ज है, उससे 40 फीसद अधिक मकान सामने आए हैं। कर विभाग की टीम भी इसपर स्टडी कर रही है। अब इस टीम ने वार्ड नंबर दो का सर्वे शुरू कर दिया है।

भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईसी) के तहत महानगर में सर्वे किया जा रहा है। शासन ने आएल एंड एफएस इनवायरमेंटल इनफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विस लिमिटेड को इस सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी है। पौने नौ करोड़ की जीआईएस एंड जीपीआर बेस्ड मैपिंग योजना के जरिए कर व्यवस्था को ऑनलाइन किया जाएगा। शहर के सभी मकान सेटेलाइट से जुड़ेंगे।

दो महीने पहले इस कंपनी ने इसपर काम शुरू किया था। दो महीने में उसे वार्ड नंबर एक के शाहपुर तिगरी सहित मोहल्लों का सर्वे पूरा किया। इस वार्ड में पूर्व में जनसंख्या 20438 दर्ज है। इसमें 10771 पुरुष व 9667 महिलाएं शामिल हैं। 2113 मकान हैं। जबकि सर्वे में मकान अधिक मिले हैं। अब सर्वे वार्ड नंबर दो का शुरू हुआ है, इसमें आदर्श नगर से इसकी शुरूआत की गई है।

कैसे लागू होगा कर?
नगर निगम जो कर वसूल रहा है, वह वर्ष 2016 के सर्वे में तय किए गए मानक के अनुरूप है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि 3.71 रुपये प्रति वर्ग फुट टॉप के हिसाब से कर लगाने का मानक है, यह 24 मीटर से ऊपर की रोड के किनारे बने मकानों पर लागू किए जाते हैं। कच्चे और पक्के मकानों पर अलग-अलग कर लागू होता है। महानगर के अलग-अलग मोहल्लों में मानकों को ध्यान में रख, उनपर कर लागू किया जाता है। भवन के क्षेत्रफल और उसकी ऊंचाई पर पुराने मानक या नए मानक के आधार पर निगम कर की सूची तैयार कर साफ्टवेयर में लोड करेगा और सेटेलाइट द्वारा कैप्चर किए भवनों पर उसे लागू कर दिया जाएगा।

देहात क्षेत्र के मकान भी आएंगे दायरे में
महानगर में कई गांव भी आते हैं। समस्या यह है कि इन गांवों के मकानों की रजिस्ट्री ही नहीं होती है। इस वजह से गांव के लोग इस कर से बच जाते हैं। यह व्यवस्था लागू होने के बाद देहात के घर भी कर के दायरे में आ सकेंगे।

सेटेलाइट के जरिए महानगर के भवनों की फोटो और डिटेल साफ्टवेयर में कैद होगी। इससे सभी भवन जो महानगर में है, उनसे कर वसूला जा सकेगा। यह व्यवस्था डिजिटल है और काफी मुफीद साबित होगी। इसपर कर विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। जिस संस्था को यह काम सौंपा गया है, उसने जीआईएस सर्वे पर बारीकियां बताई हैं। -संजय चौहान, नगर आयुक्त

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