महाशिवरात्रि: आज दुर्लभ योग में बरसेगा शिव कृपा का अमृत, श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि 15 फरवरी रविवार को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार यदि चतुर्दशी तिथि निशीथ काल में व्याप्त हो तो उसी दिन शिवरात्रि मनाई जाती है। इस बार चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की रात्रि में निशीथ काल में व्याप्त रहेगी, इसलिए व्रत और पूजन 15 फरवरी को किया जाएगा, जबकि व्रत का पारायण 16 फरवरी को होगा।

ज्योतिष पंडित सुरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार महाशिवरात्रि श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में पड़ रही है। उनका कहना है कि जब कोई महापर्व सिद्ध योग में आता है तो उसमें किए गए जप, तप, दान और पूजा का अनंत गुना फल प्राप्त होता है। सर्वार्थ सिद्धि योग सभी कार्यों की सिद्धि प्रदान करने वाला माना गया है। ऐसे में यह महाशिवरात्रि साधकों के लिए सांसारिक सुख, शांति और आत्मिक उन्नति का विशेष अवसर लेकर आई है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का चारों प्रहर पूजन करने का विधान है। अगर चारों प्रहर की पूजा नहीं कर सकते हैं तो केवल निशिथ काल में पूजा करने चारों पहर की पूजा करने का फल मिलेगा।

इस दिन रुद्राभिषेक, हवन और पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक विशेष फलदायी माना गया है। केसर मिश्रित जल अर्पित कर बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल और मिष्ठान चढ़ाने का विधान है। पूरी रात्रि दीप प्रज्ज्वलित रखकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और शिव पुराण का पाठ करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

पूजन का समय
- निशिथ काल का पूजा का समय 15 व 16 की रात को 12:09 बजे से लेकर 01:01 बजे तक
- प्रथम प्रहर: पूजन का समय 15 फरवरी को शाम 6:11 बजे से लेकर रात 9:23 बजे तक
- दूसरा प्रहर:: पूजा का समय 15 फरवरी की रात 9:23 बजे से लेकर 16 फरवरी की रात 12:35 बजे तक
- तीसरा प्रहर:: पूजा का समय 16 फरवरी की रात 12:35 बजे से लेकर सुबह 3:47 बजे तक
- चौथा प्रहर:: पूजा का समय 16 फरवरी को सुबह 03:47 बजे से लेकर सुबह 06:59 बजे तक

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