नोएडा के सोसाइटी एओए में करोड़ों का घोटाला, उप पंजीयक ने दिये फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश

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Published By Deepak Mishra
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नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर 75 स्थित गोल्फ सिटी प्लॉट नंबर-आठ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन में कथित वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। निवासियों की शिकायत पर कड़ा रुख अपनाते हुए गाजियाबाद उप पंजीयक (फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स) ने सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 की धारा-24 के तहत विस्तृत जांच और फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश जारी कर दिए हैं। अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन द्वारा शनिवार को यह जानकारी दी गयी।

उन्होंने बताया सोसाइटी निवासी शिकायतकर्ता राजपाल सिंह सहित 35 निवासियों द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों में एडवांस (कॉमन एरिया मेंटेनेंस) की वसूली को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार बिल्डर से लगभग एक करोड़ नब्बे लाख की वसूली होनी चाहिए थी, जबकि अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन ने कथित तौर पर मात्र एक करोड़ पैंतीस लाख रुपये की रिकवरी पर सहमति दी। इससे सोसाइटी को करीब पचपन लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है।

आरोप है कि इसके लिए स्टांप पेपर 17 मई 2023 को खरीदा गया और एग्रीमेंट के सभी पन्नों पर बिल्डर प्रतिनिधि के हस्ताक्षर भी नहीं हैं।01 मार्च 2023 को किया गया एग्रीमेंट विवादों में है। चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म "अग्रवाल ध्रुव एंड कंपनी" ने वर्ष 2023-24 के खातों में विसंगतियां बताते हुए फॉरेंसिक ऑडिट की सिफारिश की थी, जिसे तत्कालीन अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन ने कथित रूप से नजरअंदाज कर दिया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद उप पंजीयक कार्यालय ने प्रथम दृष्टया वित्तीय रिकॉर्ड में कमियां मानते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

दिल्ली की सीए फर्म "विनीत संदेश एंड एसोसिएट्स" को आधिकारिक जांच अधिकारी नामित किया गया है। वर्ष 2023-24 से लेकर वर्तमान तक के सभी वित्तीय अभिलेख, बैंक खाते तथा चल-अचल संपत्तियां जांच के दायरे में होंगी। जांच अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। यदि अनियमितताएं सिद्ध होती हैं, तो संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता निवासियों का आरोप है कि पिछली कमेटियों ने जनरल बॉडी मीटिंग में ऑडिट रिपोर्ट पेश नहीं की और तथ्यों को छिपाया।

उन्होंने मांग की है कि बिल्डर से पूरी बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए और फंड के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने सही हैं और सोसाइटी के वित्तीय प्रबंधन में वास्तव में कितनी अनियमितताएं हुई हैं। फिलहाल, फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश से सोसाइटी में हलचल तेज हो गई है। 

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