महाशिवरात्रि : शिवालयों में भव्य सजावट, पीएसी समेत पुलिस तैनात

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। महाशिवरात्रि के मद्देनजर शहर के प्रमुख सातों नाथ मंदिरों की भव्य सजावट की गई है। शनिवार दोपहर से ही मंदिरों के मुख्य मार्गों की साफ-सफाई की गई। वहीं, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पीएसी समेत सभी थानों की पुलिस फोर्स के साथ 50 अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। जो शरारती तत्वों पर नजर रखने के साथ सुरक्षा की कमान संभालेंगे। महिलाओं की भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए महिला कांस्टेबलों की भी ड्यूटी लगाई गई है।

डमरू की गूंज और हर-हर महादेव का उद्घोष सुनाई देने लगे, तो समझ लीजिए कि नाथ नगरी अपने आराध्य के सबसे बड़े पर्व के स्वागत के लिए तैयार है। महाशिवरात्रि के लिए इस बार भी शिव मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। प्रशासन और मंदिर समितियों ने सुरक्षा व सुगमता के विशेष इंतजाम किए हैं। कहीं, मंदिरों को भव्य डिजिटल लाइटों से सजाया गया है। वहीं, सभी मंदिरों में जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों को व्यवस्थित करने के लिए बैरिकेडिंग का काम किया गया है। महाशिवरात्रि के मद्देनजर जनपद के मंदिरों पर भारी पुलिस फोर्स तैनात रहेगी।

एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि एक कंपनी पीएसी, एक प्लाटून, शहर के सभी थानों की पुलिस फोर्स समेत 50 अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को लगाया गया है, जो मंदिर परिसर से लेकर बाहर तक सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए श्रद्धालुओं की मदद करेंगे। धोपेश्वर नाथ मंदिर, बनखंडी नाथ मंदिर, पशुपति नाथ मंदिर, अलखनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, तपेश्वर नाथ मंदिर में श्रद्धालु जल चढ़ाएंगे। थाना प्रभारियों को लगातार क्षेत्र में गश्त करते रहने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है मंदिरों की विशेषता
बाबा अलखनाथ मंदिर एक ह जार वर्ष पुराना शहर के प्राचीन मंदिरों में शामिल है। यहां पर पहले घना वन हुआ करता था। यहीं पर संत अलखिया तपस्या कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें पेड़ के नीचे शिवलिंग का पता चला था। खोदाई करने पर वहां स्वयंभू शिवलिंग निकला, जिसे वहां स्थापित किया गया। त्रिवटीनाथ मंदिर का इतिहास 550 वर्ष पुराना है। यहां स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। मान्यता है कि एक चरवाहा तीन वट वृक्षों के नीचे आराम कर रहा था। तब सपने में उसे शिवलिंग की जानकारी हुई। कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर महाभारत कालीन है। मान्यता है कि अत्रि ऋषि के शिष्य धूम्र की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और ऋषि की इच्छा अनुसार यहां पर शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित हो गए। सुभाषनगर स्थित तपेश्वरनाथ मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना है। यहां बाबा भालू दास नाम के संत ने कठिन तपस्या की, जिससे भगवान ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए। इसके बाद यहां पर शिवलिंग की स्थापना की गई। इसी तरह से सभी मंदिरों की अलग-अलग विशेषता है।

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