मुरादाबाद: रैन बसेरों में जगह नहीं, ठंड में खुले आसमान तले रात बिताने को मजबूर हैं लोग
मुरादाबाद, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में कंपकंपा देने वाली कड़ाके की ठण्ड का सितम जारी है। मुरादाबाद की बात करें तो रात में तापमान में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। दिन में जहां न्यूनतम तापमान 5 से 6 डिग्री दर्ज किया जा रहा है। वहीं रात में 3 से 4 डिग्री तक ताममान …
मुरादाबाद, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश में कंपकंपा देने वाली कड़ाके की ठण्ड का सितम जारी है। मुरादाबाद की बात करें तो रात में तापमान में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। दिन में जहां न्यूनतम तापमान 5 से 6 डिग्री दर्ज किया जा रहा है। वहीं रात में 3 से 4 डिग्री तक ताममान में गिरावट दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि रात के खुले आसमा के नीचे रात बिताना कैसा होगा।

हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि खुले आसमान के नीचे कोई मजदूर न सोये। लेकिन, महानगर की सड़कों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित सार्वजनिक स्थल पर मजदूर खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हो रहे हैं। मुरादाबाद में मजदूर व गरीब खुले आसमान के नीचे ठिठुर रहे हैं। ऊपर से 3 डिग्री तापमान और हाड़ कंपा देने वाली ठंड में कहीं किसी की जान न चली जाए, क्योंकि खुले आसमान के नीचे रात बिताने वाले मजदूर चादर या कंबल में ही करवटें बदलते नजर आ रहे हैं।

अमृत विचार टीम जब शहर की सड़कों पर निकली तो कई स्थानों पर लोग अलाव जलाकर हाथ तापते दिखे, ये वो लोग हैं जो महानगर के बाहरी क्षेत्रों से मजदूरी करने के लिए आते हैं। ऐसे लोगों को खुले आसमान के नीचे रात न काटनी पड़े इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। नगर निगम की ओर से रैन बसेरों में लोगों को आश्रय देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्षमता कम होने के कारण रैन बसेरों में रात आठ बजे के बाद ताला लटक रहा है। वहीं अस्थायी रैन बसेरे अभी तक तैयार नहीं हो सके हैं, जिसके चलते ठंड में लोग ठिठुर रहे हैं। अब देखना ये है कि प्रशासन इन गरीबों को सर्दी से बचाने के लिए क्या उपाय करता है।
बिना आधार प्रवेश नहीं
सभी रैन बसेरों में लोगों को बिना आधार कार्ड के प्रवेश नहीं दिया जा रहा। ऐसे में कई लोग खुले आसमा के नीचे सोने को मजबूर हैं। महानगर में नगर निगम की और से 9 स्थाई के साथ ही 3 अस्थायी रैन बसेरे बनाने का दावा किया गया है। लेकिन, रैन बसेरों में बेड की व्यवस्था अधिक न होने के कारण सीमित लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है। इसके बाद रैन बसेरे के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं।
ठंड बढ़ी, नहीं तैयार हुए अस्थायी रैन बसेरे
नगर निगम की ओर से मुरादाबाद व पीतलनगरी डिपो सहित रेलवे स्टेशन पर अस्थायी रैन बसेरा बनाने का दावा तो किया गया। लेकिन, अभी तक रैन बसेरे तैयार नहीं किए गए हैं। जबकि ठंड के प्रकोप से हर कोई सुबह से शाम तक ठिठुरने पर मजबूर हो रहा है। यदि समय से रैन बसेरे तैयार न किए जाए तो बाद में इन रैन बसेरों का प्रयोग नाकाफी ही साबित होगा।

रैन बसेरे फुल, 8 बजे लटक रहे ताले
रेलवे स्टेशन के पास नगर निगम का 36 बेड का रैन बसेरा है। रामगंगा विहार में 4, ढाका कुंदनपुर में 60 सहित हरथला में 30 बेड के रैन बसेरे हैं। जहां शाम ढलने के साथ ही मजदूर और राहगिर पहुंचने शुरू हो जाते हैं। समय से पहुंचने पर आधार कार्ड दिखाकर प्रवेश दिया जाता है। क्षमता फुल होने के साथ ही रैन बसेरों के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया जाता है। ऐसे में लोग रात काटने के लिए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं।
रैन बसेरों में व्यवस्था हैं होटल जैसी
नगर निगम की ओर से बनाए गए स्थायी रैन बसेरों में सुविधाएं किसी होटल से कम नहीं है। यहां दीवान बेड, गद्दे, रजाई, हीटर, सीसीटीवी कैमरों के साथ ही खाने की भी सुविधा उपलब्ध है। महिलाओं ओर पुरुषों के लिए अलग-अलग हाल में बेड लगाकर शयन की व्यवस्था की गई है। यदि रैन बसेरों में बेड की संख्या बढ़ाई जाए तो अधिक राहगिर रात बिता सकेंगे।
