Uttrakhand: राज्यपाल गुरमीत सिंह बोले, भ्रष्टाचार मुक्त कार्यशैली अपनाएं वन अधिकारी
देहरादून, अमृत विचार। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने वन सेवा में नैतिक मूल्यों एवं पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करते हुए अधिकारियों से भ्रष्टाचार से दूर रहने का आह्वान किया है। कहा कि एक अधिकारी की प्रतिष्ठा वर्षों में बनती है और एक गलत निर्णय से क्षण भर में समाप्त हो सकती है। उन्होंने अधिकारियों से प्रशासनिक दक्षता, नैतिक साहस और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
रविवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून में आयोजित संजय सिंह स्मृति व्याख्यान समारोह में राज्यपाल सिंह ने वर्ष 2025 बैच के वन सेवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों और वन कर्मियों के कल्याण और उनके परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, बीमा एवं कौशल प्रशिक्षण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। एक अधिकारी का दायित्व केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह अपने अधीनस्थों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का भी उत्तरदायी होता है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में वन सेवा के समक्ष अवैध खनन, अतिक्रमण, वनाग्नि तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व जैसी गंभीर चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का समाधान तकनीक, नवाचार और संवेदनशील दृष्टिकोण के माध्यम से संभव है। उन्होंने इको-टूरिज्म तथा वन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर स्थानीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करने पर बल दिया।
राज्यपाल ने वन सेवा के अधिकारी स्व. संजय सिंह के साहस, शौर्य, निष्ठा एवं समर्पण को स्मरण करते हुए कहा कि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। कर्तव्य पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले अधिकारी राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं और उनके आदर्श वन सेवा के प्रत्येक अधिकारी को प्रेरित करते रहेंगे। इस अवसर पर राज्यपाल ने स्व. संजय सिंह के परिजनों घनश्याम नारायण सिंह एवं कांति के साथ ही वर्ष 2025 बैच में प्रशिक्षण के दौरान श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में वन अकादमी की निदेशक भारती, पीसीसीएफ हॉफ रंजन कुमार मिश्रा एवं वन अकादमी के अधिकारी मौजूद रहे।
यह वन सेवा का मूल दायित्व
राज्यपाल ने कहा कि वनों का संरक्षण, पुनर्जीवन और सतत प्रबंधन जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है। वन क्षेत्रों में निवास करने वाले स्थानीय समुदायों को साथ लेकर चलना वन सेवा का मूल दायित्व है। कहा कि वन अधिकारियों को स्थानीय लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार करते हुए उन्हें स्वरोजगार एवं कौशल विकास से जोड़ने के प्रयास करने चाहिए। वन अधिकारी वन्यजीवों और प्रकृति को अपने परिवार का अभिन्न अंग मानकर कार्य करें।
