बाराबंकी : ब्लॉक कार्यालय जर्जर भवनों में संचालित, बीडीओ कक्ष से मनरेगा कार्यालय तक असुरक्षित, कार्रवाई ठंडे बस्ते में

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Published By Deepak Mishra
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दीपराज सिंह/देवा, बाराबंकी, अमृत विचार। विकास योजनाओं की निगरानी और 88 ग्राम पंचायतों के कार्यों का केंद्र विकासखंड देवा इन दिनों खुद बदहाली और लापरवाही का शिकार है। करीब एक दशक से जर्जर और कंडम घोषित भवनों में ही सरकारी कामकाज संचालित हो रहा है, जहां अधिकारी-कर्मचारी जान जोखिम में डालकर बैठने को मजबूर हैं। ब्लॉक परिसर की दीवारों में दरारें, झड़ता प्लास्टर और कमजोर छतें कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।

बीडीओ कक्ष, लिपिक कक्ष, मनरेगा कार्यालय, अवर अभियंता कक्ष, तकनीकी सहायक व सचिवों के कमरे वर्षों पहले असुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं। हाल ही में लोक निर्माण विभाग की टीम ने भवनों का मूल्यांकन कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। राजधानी लखनऊ से सटे इस ब्लॉक कार्यालय में प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, जिससे संभावित खतरा और बढ़ गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी।

करीब 10 वर्ष पूर्व ही ब्लॉक परिसर के भवनों को जर्जर व कंडम घोषित किया जा चुका है। पीडब्ल्यूडी टीम द्वारा हाल में पुनः मूल्यांकन कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। धनराशि प्राप्त होते ही जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण व नए भवन निर्माण की कार्रवाई शुरू कराई जाएगी... डॉ. नेहा शर्मा, खण्ड विकास अधिकारी, देवा।

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