डिजिटल क्रांति के साथ साइबर क्राइम में तेजी, DGP राजीव कृष्ण ने दी चेतावनी, ठगी हो तो तुरंत डायल करें 1930
लखनऊ, अमृत विचार: डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा डिजिटल क्रांति ने आमजन के जीवन में बड़ा परिवर्तन किया है। मोबाइल, इंटरनेट और ऑनलाइन भुगतान अब दैनिक आवश्यकता बन चुके हैं। कोविड-19 महामारी के बाद 70–80 फीसदी नागरिक डिजिटल ट्रांजेक्शन को सामान्य जीवनशैली के रूप में अपना चुके हैं। हालांकि दूसरा पहलू देखें तो सुविधाओं के साथ साइबर अपराधों में भी तेजी आई है। उन्होंने कहा कि लोग डिजिटल अरेस्ट में न फंसे। ठगे जाने पर तुरंत करें 1930 साइबर हेल्पलाइन पर काल करें।
डीजीपी गुरुवार को इटावा में साइबर जागरूकता कार्यशाला को वर्चुअल रूप से संबोधित कर रहे थे। उन्हों ने कहा सामान्य नागरिकों से जुड़े साइबर अपराध मुख्यतः तीन प्रकार के हैं। पहला, वित्तीय लेन-देन से संबंधित साइबर फ्रॉड, जो कुल मामलों का लगभग 55–60 प्रतिशत है। इसके प्रमुख कारण लालच, लापरवाही और मनोवैज्ञानिक भय हैं। उन्होंने आगाह किया कि अत्यधिक और सुनिश्चित लाभ का दावा करने वाली योजनाएं संदिग्ध होती हैं। निवेश केवल सेबी या आरबीआई से अधिकृत संस्थानों में ही करना चाहिए। अनजाने लिंक, एपीके फाइल या फर्जी मैसेज पर क्लिक करना मोबाइल हैकिंग का कारण बन सकता है।
दूसरा, सोशल मीडिया से संबंधित अपराध। उन्होंने अभिभावकों और युवाओं को सोशल मीडिया व ऑनलाइन गेमिंग की लत से सावधान रहने की सलाह दी। उनका कहना था कि साइबर गेमिंग में हमेशा गेम बनाने वाला जीतता है। तीसरा, तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’, जिसमें अपराधी स्वयं को पुलिस या जांच एजेंसी बताकर वीडियो कॉल के जरिए धन की मांग करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की कोई भी सरकारी एजेंसी ऑनलाइन गिरफ्तारी या समझौते के नाम पर पैसे नहीं मांगती।
ठगी रकम वापस दिलाई जा सकती है
डीजीपी ने कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा ठगे जाने की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें, जिससे संदिग्ध खातों को शीघ्र फ्रीज कराया जा सके। वर्ष 2014 में प्रदेश में एक ही साइबर थाना था, जबकि अब प्रत्येक जिले में साइबर थाना और सभी 1581 थानों में साइबर हेल्पडेस्क स्थापित हैं। लगभग 26 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। अंत में उन्होंने नागरिकों से साइबर सुरक्षा के एंबेसडर बनकर जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
