Bareilly: मां के साथ रेप करने वाले बेटे को आजीवन कठोर कारावास की सजा

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
On

विधि संवाददाता, बरेली। चार वर्ष पहले विधवा मां से दुष्कर्म करने वाले भमोरा थाना क्षेत्र निवासी आरोपी बेटे (22) को परीक्षण में परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय अशोक कुमार यादव ने आजीवन कठोर कारावास और 22 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी। जुर्माने से 20 हजार की रकम पीड़िता को बतौर मुआवजा दी जायेगी।

सरकारी वकील सुरेश बाबू साहू ने बताया कि पीड़िता ने थाना भमोरा में तहरीर देकर बताया था कि 10 अक्टूबर 2021 की देर रात 11 बजे वह घर में सो रही थी, तभी उसका पुत्र बाहर से आया और उसने कुंडी खटखटाई और बोला कि मुझे भूख लगी है। मैंने गेट खोला, तभी उसने एक हाथ से मेरा गला दबा दिया और दूसरे हाथ से मेरे कपड़े उतार दिये। उसने दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। मैंने घर से भागकर अपने अन्य बेटों को फोन किया। 12 अक्टूबर 2021 को दोनों लड़के बाहर से आए थे। वह बाहर मजदूरी करते हैं, उनकी सहायता से आरोपी बेटे को पकड़कर लाए। पुलिस ने दुष्कर्म, धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर 40 दिन के भीतर विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट भेजा। आरोपी छह भाइयों में तीसरे नंबर का था। घटना के वक्त आरोपी शराब के नशे में था। अभियोजन ने मामले में 8 गवाह पेश किए थे।

गवाही के दौरान मां व दोनों भाई मुकरे, डीएनए रिपोर्ट बनी सजा का आधार
गवाही के दौरान पीड़िता अपने बयान से मुकर गयी। बोली कि रात में कोई अंजान व्यक्ति घर के अंदर आया था, दुष्कर्म किया था। पुत्र ने दुष्कर्म नहीं किया। वहीं मुल्जिम के दोनों भाई भी अपने बयान से मुकर गये थे। विवेचना के दौरान पुलिस ने मौके से 21 बाल बरामद किये थे। डीएनए मैच में 20 बाल पीड़िता के पुत्र व 1 बाल पीड़िता का पाया गया। इसके अतिरिक्त पीड़िता व मुल्जिम के कपड़े भी सील किए थे। डीएनए जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी।

इतना घोर कलयुग नहीं कि मां अपने ही बेटे को फंसा दे
अदालत ने 36 पेज के आदेश में मामले को विरल से विरलतम माना। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कलयुग तो चल रहा है, मगर इतना घोर कलयुग नहीं है कि कोई मां अपने पुत्र को अपने ही दुष्कर्म के झूठे केस में फंसा दे।

''मेडिकल, डीएनए रिपोर्ट्स जुर्म साबित करने के लिए पर्याप्त हैं, यह सही है कि पीड़िता एक मां है और बेटे ने गलत किया है लेकिन मां-मां होती है, ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़िता इसी कारण जिरह में मुल्जिम द्वारा घटना कारित करने से इंकार किया है। यह प्रकरण स्वयं में एक अपवाद है। परिस्थितियां स्वयं बोल रही हैं कि अभियुक्त ने ही पीड़िता के साथ दुष्कर्म जैसा घृणित अपराध किया है। जब मुल्जिम अपनी मां के साथ ऐसी घटना कर सकता है, तब ऐसे व्यक्ति को छूट दिया जाना कहीं से न्यायोचित नहीं है।''

अशोक कुमार यादव अपर सत्र न्यायाधीश, त्वरित न्यायालय

संबंधित समाचार