योगी सरकार का बड़ा फैसला : यूपी के हर जिले में विकसित होंगे मॉडल तालाब, ग्रे वाटर और प्लास्टिक अपशिष्ट मुक्त होंगे गाँव
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश सरकार ने तालाबों के पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से प्रदेश के प्रत्येक जिले में 100-100 तालाबों को "मॉडल तालाब" के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समुदाय के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इन मॉडल तालाबों को ग्रे वाटर और प्लास्टिक अपशिष्ट से मुक्त बनाया जाएगा।
इससे जल की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा मच्छरजनित रोगों में कमी आने की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब जल संचयन, भूजल रिचार्ज, सिंचाई, जैव विविधता संरक्षण और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र रहे हैं। लेकिन स्नान, रसोई और कपड़े धोने से निकलने वाला ग्रे वाटर बिना उपचार के सीधे तालाबों में जाने तथा प्लास्टिक कचरे के बढ़ते प्रभाव से इनका स्वरूप प्रभावित हो रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत पंचायती राज विभाग ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। "तालाब मेरा, तालाब मेरी जिम्मेदारी" अभियान के तहत प्रत्येक जिले में 100 तालाबों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस संबंध में मिशन निदेशक द्वारा सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। पहले चरण में 5,000 से अधिक आबादी वाले गांवों में अभियान चलाया जाएगा।
चयनित तालाबों में गिरने वाले ग्रे वाटर की मात्रा, नालियों की संख्या, प्लास्टिक अपशिष्ट की स्थिति तथा बीओडी (जैविक ऑक्सीजन मांग) की जांच की जाएगी, ताकि सुधार का आकलन किया जा सके। मॉडल तालाबों के आसपास "नो प्लास्टिक जोन" घोषित किया जाएगा। ग्राम पंचायत से तालाब में प्लास्टिक न फेंकने का प्रस्ताव पारित कराया जाएगा।
नालियों पर प्लास्टिक ट्रैप जाली और फिल्टर चैंबर लगाए जाएंगे, जबकि ग्रे वाटर के उपचार के लिए बायो-फिल्टर प्रणाली विकसित की जाएगी, जिसमें कंकड़, रेत तथा केना जैसे पौधों का उपयोग होगा। उपचारित जल को ही तालाब में प्रवाहित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से तालाबों का संरक्षण होगा, जल गुणवत्ता सुधरेगी और ग्रामीण स्वास्थ्य व पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
