UP : डेटा आधारित होगी अफसरों की गोपनीय रिपोर्ट, एसीआर में अनिवार्य होगा लंबित, नए और निस्तारित मामलों का ब्योरा

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : शासन ने अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (एसीआर) प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए इसे पूरी तरह डेटा आधारित बनाने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गुरुवार को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अब केवल सामान्य टिप्पणी नहीं, बल्कि लंबित मामलों, नए वादों और निस्तारित प्रकरणों की संख्या (डेटा) को एसीआर का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाएगा।

शासनादेश के अनुसार यह व्यवस्था भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और उत्तर प्रदेश सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा/पीसीएस) के सभी अधिकारियों पर लागू होगी। अधिकारियों को अब स्पैरो पोर्टल पर अपनी वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि के लिए स्व-मूल्यांकन करते समय यह डेटा अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। मुख्य सचिव ने आदेश में कहा है कि रिपोर्टिंग अधिकारी, समीक्षा अधिकारी, स्वीकृति अधिकारी तीनों को अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए लंबित, नए और निस्तारित मामलों के डेटा को संज्ञान में लेते हुए ही अपना मूल्यांकन करना होगा। अब बिना तथ्यों के सामान्य या औपचारिक टिप्पणी को पर्याप्त नहीं माना जाएगा।

एसीआर की अवधि में दर्ज होगा पूरा प्रशासनिक रिकॉर्ड
शासनादेश के अनुसार एसीआर की निर्धारित अवधि के दौरान पूरा प्रशासनिक रिकार्ड दर्ज करना होगा। इसमें कितने मामले पहले से लंबित थे, कितने नए मामले दर्ज हुए और कितने मामलों का निस्तारण किया गया शामिल होगा। इन सभी का स्पष्ट संख्यात्मक विवरण दर्ज किया जाएगा। इसका उद्देश्य कार्य निष्पादन का वस्तुनिष्ठ, पारदर्शी और तुलनात्मक आकलन सुनिश्चित करना है।

मनमानी पर लगेगी रोक
शासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से गोपनीय रिपोर्ट में मनमानी और पक्षपात पर रोक लगेगी। अधिकारियों के कार्य प्रदर्शन का वास्तविक मूल्यांकन हो सकेगा। जवाबदेही और कार्यसंस्कृति में सुधार आएगा। मुख्य सचिव ने साफ किया है कि यह व्यवस्था प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक अहम कदम है और इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।

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