UP : बेघर घुमंतू परिवारों को हाईकोर्ट से बड़ी उम्मीद, अनदेखी करने पर कैसरगंज तहसीलदार पर 50 हजार का जुर्माना
लखनऊ/बहराइच, अमृत विचार : पीढ़ियों से दर-बदर भटकते बेघर घुमंतू परिवारों की ये अंतहीन दौड़ एक अदद घर (आवास) से खत्म हो सकती है, लेकिन सिस्टम इतना उदार नहीं है। ग्राम सभा की जमीन का पट्टा आवंटित करके प्रधानमंत्री आवास पाने के लिए सालों से संघर्ष कर रहे बहराइच के घुमंतू समुदाय के पांच परिवारों को हाईकोर्ट से उम्मीद की एक किरण मिली है। पट्टा आवंटन में लापरवाही बरतने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कैसरगंज की तहसीलदार मीना गौड़ पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। स्पष्ट निर्देश के साथ कि जुर्माना राशि तहसीलदार के वेतन से की जाएगी।
प्रकरण कैसरगंज तहसील के बांसगांव से जुड़ा है। गांव में घुमंतू समुदाय के 5 परिवार झोपड़-पट्टी डालकर रह रहे हैं। पीएम आवास के तौर पर इन्होंने अपने घर का ख्वाब देखा। तहसील प्रशासन के पास अर्जी लगाई कि ग्राम सभा की जमीन का पट्टा दे दिया जाए, ताकि वे पीएम आवास के लिए आवेदन कर सकें। एक परिवार के मुखिया विकलांग हैं। स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के बाद इन परिवारों ने कानूनी सहारा लिया।
हाईकोर्ट के एडवोकेट आशीष कुमार सिंह जोकि मूलरूप से बहराइच के निवासी हैं-इन परिवारों का सहारा बने। उन्होंने हाईकोर्ट में घुमंतू परिवारों की पैरवी की। चूंकि गांव में ग्राम सभा की भूमि उपलब्ध थी। इसलिए इन परिवारों को स्थायी बसेरा दिलाना असंभव भी नहीं है। लेकिन ग्राम सभा और जिम्मेदार अधिकारी अनदेखी का रवैया अपनाए रहे।
न्यायालय ने 15 जुलाई 2025 को स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए कि ग्राम सभा की भूमि से अवैध पट्टा कब्जा हटाकर पट्टा आवंटन पर विचार किया जाए। इसके बावजूद मामला दबा दिया गया। इस बीच ग्राम सभा की भूमि के एक गाटे के कब्जेदार ने दूसरे को भूमि उपहार में दे दी। इसी साल 27 जनवरी को हाईकोर्ट में यह मामला फिर सुना गया। हाईकोर्ट ने तहसीलदार को नोटिस जारी करते हुए 26 फरवरी को सुनवाई की तारीख मुकर्रर की थी। न्यायालय से नोटिस जारी होने के बाद तहसीलदार ने आनन फानन में 29 जनवरी को अवैध कब्जेदारों को 67 का नोटिस जारी करते हुए भूमि खाली कराने का निर्देश दिया।
26 फरवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान तहसीलदार पेश हुईं। हाईकोर्ट ने कार्यवाही की वस्तुस्थिति जानी। लापरवाही पाए जाने पर तहसीलदार मीना गौड़ पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। ये कहते हुए कि जुर्माने की राशि सरकार द्वारा वहन नहीं की जाएगी, बल्कि तहसीलदार के वेतन से भरपाई होगी।
घुमंतू समुदायों के लिए पैरवी करने वाले एडवोकेट आशीष कुमार सिंह के मुताबिक, माननीय हाईकोर्ट ने छह सप्ताह के अंदर इस प्रकरण का निस्तारण करने का आदेश दिया है। उन्होंने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बेघर परिवारों को अपना घर मिलने की उम्मीद जगी है।
