डायरी खोलेगी सत्ता और सियासत की सांठगांठ का सच : अफसरों की ब्लैक मनी ठेकों और खनन में लगे होने का हो सकता है खुलासा

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार: बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के यहां छापे में नकदी, जेवर के साथ ही कथित तौर पर एक डायरी भी मिली है। डायरी में जहां शासन और प्रशासन के कई बड़े अफसरों को लेन-देन का ब्यौरा है, वहीं कई नौकरशाहों की ब्लैक मनी भी खनन और ठेकों में एडजस्ट करने के दस्तावेज भी मिले हैं। साफ है कि डायरी में एक तरह से सत्ता और सियासत की सांठगांठ का सच दर्ज है। उधर डायरी मिलने की खबर फैलने के साथ ही कई अफसरों और सफेदपोशों की बैचेनी बढ़ती जा रही है।

विधायक उमाशंकर सिंह ने जब से सियासत में कदम रखा, तब से उनके रसूख के साथ ही संपत्ति भी अमरबेल की तरह बढ़ती रही। विधायक बनने के बाद तो संपत्तियों में काफी इजाफा होता रहा। उनके रसूख का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि भले ही वह बसपा से तीन बार के विधायक हैं, लेकिन सत्ता चाहे सपा की रही हो या फिर भाजपा की। उनसे संबंधित कंपनियों को सड़क निमार्ण के साथ ही खनन के ठेके भी मिलते रहे हैं। यहां तक कि नियमों को ताक पर रखकर भी ठेके दिए जाते रहे। सपा सरकार में जहां वह एक कद्दावर मंत्री के ठेकों में पार्टनर रहे, वहीं अगस्त 2025 में उमाशंकर सिंह से जुड़ा पत्थर खनन का मामला सामने आया था। उमाशंकर की पत्नी की कंपनी छात्र शक्ति इंफ्रा कंस्ट्रक्शन ने सोनभद्र में खनन का पट्टा लिया था। कंपनी ने 3,000 रुपए प्रति घनमीटर के रेट से पत्थर खनन का का पट्टा लिया था, जबकि रायल्टी दर 160 रुपए प्रति घनमीटर थी।

आरोप लगा था उमाशंकर की पत्नी की कंपनी ने 33,604 घनमीटर गिट्टी का अवैध खनन किया था। यदि नीलामी की दर से वसूली होती तो कंपनी को करीब दस करोड़ की धनराशि सरकारी खजाने में देनी होती। इससे सरकारी खजाने को काफी नुकसान पुहंचा। अब सवाल यह है कि यह रेट और रायल्टी के खेल बिना किसी आला नौकरशाही और कद्दावर सफेदपोश के वरदहस्त बगैर नहीं सकता। इसी तरह के कई अन्य मामले हैं, जोकि विवादों में रहे। उधर छापे के बाद उमाशंकर सिंह से जुड़े नेताओं और अफसरों को भविष्य में खुद के घिर जाने की भी चिंता सता रही है। यही कारण हैं कि छापे के दूसरे दिन भी छात्र शक्ति कंपनी के कारपोरेट आफिस के बाहर महंगी गाड़ियों से लोग आते रहे। बाहर से ही छापे की अपने तरीके से जानकारी ली और चलते बने।

आखिर छापे के पीछे कौन
विधायक के साथ ही मैनेजमेंट में माहिर माने जाने वाले उमाशंकर सिंह के यहां छापा पड़ा है तो तमाम सवाल उठ रहे हैं। इसमें अहम सवाल यह है कि आखिरकार बसपा बसपा विधायक के यहां आयकर के छापे के पीछे कौन हैं? ऐसी कौन सी बड़ी शक्ति है, जिसके इशारे पर बसपा प्रमुख मायावती के सबसे खास रहे विधायक के यहां कार्रवाई हुई। वह भी जब विपक्ष बसपा को कथित तौर पर भाजपा की बी टीम बताता रहा है। हालांकि सरसरी तौर पर पत्थर खनन में कैग की रिपोर्ट और विजीलेंस की जांच को ही छापे के पीछे असल वजह माना जा रहा है, लेकिन लोगों के गले से यह बात नहीं उतर पा रही है।

विधायक के बेटे ने कहा: हम पूरा सहयोग कर रहे हैं
विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस युकेश सिंह ने गुरुवार को चुप्पी तौड़ी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया कि कल गोमतीनगर आवास पर इनकम टैक्स विभाग की ओर से जांच की गई। उनके पिता, वह स्वयं और परिवार के अन्य सदस्य विभाग के अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। इनकम टैक्स अधिकारी भी पूरी प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं। उनके पिता स्वस्थ हैं। वह दवाइयां लेते हुए आराम का ध्यान रख रहे हैं। युकेश सिंह ही सीएस इंफ्रा-कंस्ट्रक्शन लिमिडेट के सीईओ हैं।

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