लखनऊ : किसानों ने फूंका एलडीए का पुतला, लाठी-डंडों से पीटा

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Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : सन् 1984 में गोमती नगर उजरियांव योजना में अधिग्रहित की गई जमीन का संपूर्ण भुगतान न होने पर शुक्रवार को किसान लामबंद हो गए। भारतीय किसान यूनियन राष्ट्रीयतावादी अराजनैतिक के साथ सैकड़ों महिला और पुरुष किसान लाठी-डंडा और हसिया लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण पहुंचे। गेट नंबर 1 के पास धरना-प्रदर्शन किया। 41 साल से मुआवजा और अन्य मांगे पूरी न होने पर नारेबाजी की।

एलडीए का पुतला हसिया व लाठी-डंडों से पीटकर आग के हवाले कर दिया। इस बीच पुलिस बल पहुंचा और रोकने का प्रयास किया। आपस में नोकझोंक हुई। घंटों प्रदर्शन चला। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक यादव ने बताया कि योजना में फेज-1 व 2 में तखवा, चिनहट, कटौता, चकमल्हौर, बड़ा भरवारा, रिसहा, विजयीपुरी, गुलाम हुसैन पुरवा समेत 25 गांव की जमीन अधिग्रहित की थी। उस समय 85 पैसे स्क्वायर फीट के हिसाब से मुआवजा मिला। कोर्ट गए तो 2.50 रुपये, इसके बाद कोर्ट के आदेश पर 4.60 रुपये किए गए, लेकिन एलडीए ने भुगतान नहीं किया। कुछ देर बाद पहुंचे अधिकारियों ने अभिलेख देखे और बात सुनी। ज्ञापन लेकर समाधान का आश्वासन दिया।

करीब चार हजार किसान प्रभावित, पेयजल की व्यवस्था नहीं
अशोक यादव ने बताया कि इस योजना में करीब 4 हजार किसान प्रभावित हैं, जो सर्किल रेट मांग रहे हैं। किसानों को चार हजार भूखंड, जीवन-यापन के लिए चबूतरे, बरात घर का आश्वासन अधूरा है। गुलाम हुसैन पुरवा और रिहसा गांव में पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसके अलावा चबूतरों का आवंटन भी नहीं किया है। चिनहट तिराहे पर अवैध 24 वर्ष से अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे हैं।

 मुख्य मांगे

- विशेष खंड में 22 चूबतरों की लॉटरी निरस्त की जाए
- मुआवजे में काटा 11.2 फीसद इनकम टैक्स वापस लें

- लखनऊ पब्लिक स्कूल के पास बारात और किसान भवन बने
- विकल्प खंड में रोहित रेजिडेंसी के पास 4 हजार भूखंड विकसित करें

- गोमती नगर फेज-2 में शेष दो श्मशान घाट दिए जाएं

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